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Poetry

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

प्यार और मुक्त हृदय

वह तुम्हारा मुक्त हृदय था जिसने मुझे प्यार का विश्वास दिया, मैं तुम्हें प्यार करने लगा। मैं तुम्हें प्यार करता था अपनी समस्त जड़ता से ऊपर उठकर और इसलिये ही तुम मुक्त हृदय थे।

Poetry, Ramyantar

बनारस की होली बनारस की बोली में

अब का पूछ्त हउआ हमसे कि होली का होला। कइसे तोंहके हाल बताई कवन तरीके से समझाई कइसन बखत रहल हऽ ऊ भी कवने भाषा में बतलाई, उछरत रहल बांस भर मनवां जमत रहल जब गोला। छैल चिकनियां छटकत रहलन…

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

ईश्वर की कानाफूसियाँ

हम सबके अपने-अपने अलग-अलग ईश्वर कानाफूसी किया करते हैं। क्या संसार के  हम सभी लोगों को चुप नहीं हो जाना चाहिये- जैसा ’इमरसन’ कहता है- कि हम ईश्वर की कानाफूसियाँ सुन सकें!

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

विशिष्ट अनुभव

photo :http://www.surrealview.net/art.htm विशिष्ट अनुभव है क्या? यही कि कोयल के गीतों में हमें गणित के सवालों के हल मिलें और बाघ की मुस्कराहट के कूटार्थ हम समझ लें।

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

कल-आज आजकल

आज तुम      मेरे सम्मुख हो, मैं तुम्हारे ‘आज’ को ‘कल’ की रोशनी में देखना चाहता हूँ। देखता हूँ तुम्हारे ‘आज का कल’ ‘कल के आज’ से तनिक भी संगति नहीं बैठाता। कल-आज आजकल समझ में नहीं आते मुझे।

Poetry, Ramyantar

एक गाँव

सड़क उसके बीच से गुजरती है गुजरते हैं सड़क पर चलने वाले लोग पर थोड़ा ठहर जाते हैं, दम साध कर खड़ा है वह कुछ तो आकर्षण है उसमें कि सड़क से गुजरने वाला हर आदमी ठहर कर निरख ही…

Poetry, Ramyantar

वहाँ भी डाकिया होगा?

enveloppen (Photo credit: Wikipedia) क्यों ऐसा होता था कि डाकिया रोज आता था पर तुम्हारा लिखा हुआ पत्र नहीं लाता था। क्यों ऐसा होता था कई बार कि जब भी मैंने डाकिये से माँगा तुम्हारा पत्र उसने थमा दिये मनीआर्डर…

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और ……अंधेरा

(Photo credit: MarianOne) आज फिर एक चहकता हुआ दिन गुमसुमायी सांझ में परिवर्तित हो गया, दिन का शोर खामोशी में धुल गया, रात दस्तक देने लगी। हर रोज शायद यही होता है फिर खास क्या है? शायद यही, कि मेरे…