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Poetry, Ramyantar

दिया राहु लिख चन्द्रमा लिखते-लिखते

 Flowers (Photo credit: soul-nectar) कविता: प्रेम नारायण ’पंकिल’ जो बोया वही तो फसल काटनी है दिया लिख अमा पूर्णिमा लिखते-लिखते। पथिक पूर्व का था चला किन्तु पश्चिम दिया राहु लिख चन्द्रमा लिखते-लिखते। रहा रात का ही घटाटोप बाँधेन बाहर निकलकर…

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

कविता और कविता का बहुत कुछ

१) कविता उमड़ आयी अन्तर्मन में जैसे उतर आता है मां के स्तनों में दूध। २)  कविता का छन्दसध गया वैसे हीजैसे स्काउट की ताली मेंमन का उत्साह। ३)  कविता का शब्दसज गया बहुविधिजैसे बनने को मालासजते हैं फूल। ४)कविता…

Poetry, Ramyantar

हंसी का व्यवहार

Hibiscus (Photo : soul-nectar) आंसू खूब बहें, बहते जांय हंसी नहीं आती, पर हंसी खूब आये तो आंखें भर-भर जाती हैं आंसू आ जाते हैं आंखों में। कौन-सा संकेत है यह प्रकृति का? वस्तुतः कितना विलक्षण है हंसी का यह…

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मैंने कविता लिखी

मैंने कविता लिखी जिसमें तुम न थे तुम्हारी आहट थी और इस आहट में एक मूक छटपटाहट मैंने कविता लिखीजिसमें उभरे हुए कुछ अक्षर थेयद्यपि वो फूल नहीं थेपर फिर भी उनमें गंध थी मैंने कविता लिखीजिसमें इन्द्रधनुष नहीं थाहाँ,…

Poetry, Ramyantar

तो उसका अंशभूत सौन्दर्य निरखूंगा

Rose Bud (Photo credit: soul-nectar) यदि देख सका किसी वस्तु को उसकी पूर्णता में तो रचूंगा जो कुछ वह पूर्णतः अनावरित करेगा स्वयं को सौन्दर्य है क्या सिवाय एक केन्द्रीभूत सत्य के?जैसे सूरज या फिरजैसे आत्माजो अपनी अभिव्यक्ति,अपने प्रसार में…

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तनिक पहचानें

तनिक पहचानें उस शील को जो डरता तो है संसार की अनगिनत अंधेरी राहों में चलते हुएपर अपने मन मेंऔर दूसरों की दृष्टि मेंबनना चाहता है वीरऔर इसलियेगाने लगता है।

Poetic Adaptation, Poetry, Ramyantar

जो प्रश्न हैं अस्तित्वगत…

जो प्रश्न हैं अस्तित्वगत तूं खींच चिन्तन बीच मत बस जी उसे उस बीच चल उससे स्वयं को दे बदल। यदि प्रेम को है जानना तो खाक उसकी छानना उस प्रेम के भीतर उतर निज पूर्ण कायाकल्प कर। जो प्रश्न…

Poetry, Ramyantar

पात-पात में हाथापायी बात-बात में झगड़ा

पात-पात में हाथापायी बात-बात में झगड़ा किस पत्थर पर पता नहीं मौसम ने एड़ी रगड़ा। गांव गिरे औंधे मुंह गलियां रोक न सकीं रुलाई ’माई-बाबू’ स्वर सुनने को तरस रही अंगनाई, अब अंधे के कंधे पर बैठता नहीं है लंगड़ा।…

Poetry, Ramyantar, Songs and Ghazals

ले प्रसाद जय बोल सत्यनारायण स्वामी की

बजी पांचवी शंख कथा वाचक द्रुतगामी की। ले प्रसाद जय बोल सत्यनारायण स्वामी की। फलश्रुति बोले जब मन हो चूरन हलवा बनवाओ बांट-बांट खाओ पंचामृत में प्रभु को नहलाओ, इससे गलती धुल जायेगी क्रोधी-कामी की। कलश नवग्रह गौरी गणपतिपर दक्षिणा…

Poetry, Ramyantar

प्रार्थना मैं कर रहा हूं

प्रार्थना मैं कर रहा हूं गीत वह अव्यक्त-सा अनुभूतियों में घुल-मिले। हंसी के भीतर छुपा बेकल रुंआसापन और सम्पुट में अधर के बेबसी का क्षण, प्रार्थना मैं कर रहा हूं अश्रु जो ठहरा हुआ शुभ भाव ही के हित निकल…