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शैलबाला शतक: भोजपुरी स्तुति काव्य (चार)

Bhojpuri Stuti Kavya

शैलबाला शतक: भोजपुरी स्तुति काव्य के चार और कवित्त प्रस्तुत हैं! करुणामयी जगत जननी के चरणों में प्रणत निवेदन हैं कवित्त! शतक में शुरुआत के आठ कवित्त काली के रौद्र रूप का साक्षात दृश्य उपस्थित करते हैं। पिछली तीन प्रविष्टियाँ…

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शैलबाला शतक: भोजपुरी स्तुति काव्य (तीन)

प्रस्तुत हैं शैलबला शतक: स्तुति काव्य के चार और कवित्त!  करुणामयी जगत जननी के चरणों में प्रणत निवेदन हैं यह कवित्त! शतक में शुरुआत के आठ कवित्त काली के रौद्र रूप का साक्षात दृश्य उपस्थित करते हैं।  पिछली दो प्रविष्टियाँ…

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शैलबाला शतक: भोजपुरी स्तुति काव्य (दो)

माँ के काली स्वरूप की अभ्यर्थना के चार कवित्त पुनः प्रस्तुत हैं। इस भोजपुरी स्तुति काव्य में शुरुआत के आठ कवित्त काली के रौद्र रूप का साक्षात दृश्य उपस्थित करते हैं।  रौद्र-रूपा काली के सम्मुख दीन-असहाय बालक पुकार रहा है।…

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शैलबाला शतक: भोजपुरी स्तुति काव्य (एक)

जीवन में ऐसे क्षण अपनी आवृत्ति करने में नहीं चूकते जब जीवन का केन्द्रापसारी बल केन्द्राभिगामी होने लगता है। मेरे बाबूजी की ज़िन्दगी की उसी बेला की उपज है शैलबाला शतक! अनेकों झंझावातों में उलझी हुई जीवन की गति को…

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रामजियावन दास बावला: भोजपुरी के तुलसीदास

रामजियावन दास बावला को पहली बार सुना था एक मंच पर गाते हुए! ठेठ भोजपुरी में रचा-पगा ठेठ व्यक्तित्व! सहजता तो जैसे निछावर हो गई थी इस सरल व्यक्तित्व पर! ’बावला’ भोजपुरी गीतों के शुद्ध देशज रूप के सिद्धहस्त गवैये…