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प्रसंगवश

वैवाहिक सप्तपदी: वर वचन

वैवाहिक सप्तपदी वर वचन

वैवाहिक सप्तपदी: वर वचन हौं गृह-ग्राम रहौं जब लौं तब लौं ही तू साज सिंगार सजौगी।भाँतिन-भाँति के हास-विलास कुतूहल क्रीड़ा में राग रचौगी।पै न रहूँ घर तो न अभूषण पेन्होगी तूँ परधाम रहोगी।प्रानप्रिये ये करो प्रन तूँ हमरी पहली बतिया…

प्रसंगवश

वैवाहिक सप्तपदी: कन्या वचन

वैवाहिक सप्तपदी: कन्या-वचन देवनि देवि अनेकन पूजि कियो जग जीवन पुण्य घना। निज अर्चन वंदन पुण्य-प्रताप ते पायौ तुम्हें अब हौं सजना। तुम सौम्य सदा रहना जो गृहस्थ को जीवन हौ दुख-सुक्ख सना। तब बाम तुम्हारे बिराजुंगी मैं, सजना हमरी…

Article on Authors, भोजपुरी

रामजियावन दास बावला: भोजपुरी के तुलसीदास

रामजियावन दास बावला को पहली बार सुना था एक मंच पर गाते हुए! ठेठ भोजपुरी में रचा-पगा ठेठ व्यक्तित्व! सहजता तो जैसे निछावर हो गई थी इस सरल व्यक्तित्व पर! ’बावला’ भोजपुरी गीतों के शुद्ध देशज रूप के सिद्धहस्त गवैये…

Audio, Ramyantar

हाय दइया करीं का उपाय…

चारु और मैं इधर संवाद-स्वाद, फिर अवसाद के कुछ क्षणों से गुजरते हुए चारुहासिनी की मनुहार से बाबूजी के लिखे कई गीत यूँ ही गुनगुनाता रहा। अपनी सहेलियों को बाबूजी के लिखे गीतों को गा-गाकर सुनाना और फिर अपनी इस…

General Articles, भोजपुरी, लोक साहित्य

तेहिं तर ठाढ़ि हिरनियाँ : सोहर

अम्मा सोहर की पंक्तियाँ गुनगुना रही हैं – “छापक पेड़ छिउलिया कि पतवन गहवर हो…”। मन टहल रहा है अम्मा की स्वर-छाँह में। अनेकों बार अम्मा को गाते सुना है, कई बार अटका हूँ, भटका हूँ स्वर-वीथियों में। कितनों को…

Ramyantar

मलहवा बाबा फिर आ गये …

ढोलक  टुनटुनाते हुए, इस वर्ष भी गाते हुए बाबा आ गये । हमने कई बार अपना ठिकाना बदला- दो चार किराये के घर, फिर अपना निजी घर; बहुतों की संवेदना बदली- पर बाबा आते रहे । मैं उन्हें मलहवा बाबा…