Category

प्रसंगवश

Stories, प्रसंगवश

डायोजिनीज़ (Diogenes) का एक प्रेरक प्रसंग

Greek Philosopher Diogenes

डायोजिनीज़ (Diogenes) के जीवन से जुड़ा यह प्रेरक प्रसंग शान्तचित्त रहने के अभ्यास को रेखांकित करता है। मनुष्य का स्वभाव है, प्रत्येक परिस्थिति एवं कार्य के प्रति अपनी धारणा बनाना। अभाव में भी स्वभाव न छूटता है। विपन्नता में भी…

Ramyantar, प्रसंगवश

ग्रीष्म-1: ग्रीष्म-गरिमा-2

ग्रीष्म श्रूंखला में ब्रजभाषा से निकली यह ’ग्रीष्म-गरिमा’ आपके सम्मुख है, कवि हैं अल्पज्ञात कवि ’सत्यनारायण’। पहली कड़ी के बाद आज दूसरी कड़ी – ग्रीष्म-गरिमा जबै अटकत आपस में बंस, द्रोह दावानल पटकत आय । खटकि चटकत करिवे निज ध्वंस,…

Ramyantar, प्रसंगवश

ग्रीष्म-1: ग्रीष्म-गरिमा-1

गर्मी की बरजोरी ने बहुतों का मन थोर कर दिया है, मेरा भी। वसंत का मगन मन अगन-तपन में सिहुर-सा गया है। कोकिल कूकने से ठहरी, भौरा गुंजरित होने से, फिर अपनी क्या मजाल कि इस बउराती लूह के सामने…

Ramyantar, प्रसंगवश

वैवाहिक सप्तपदी (वर-वचन)

पढ़ने के लिए बहुत दिनों से सँजो कर रखी अपने प्रिय चिट्ठों की फीड देखते-देखते वाणी जी की एक प्रविष्टि पर टिप्पणी करने चला । उस प्रविष्टि में वैवाहिक सप्तपदी का उल्लेख था, सरल हिन्दी में उसे प्रस्तुत करने की…

Ramyantar, प्रसंगवश

वैवाहिक सप्तपदी (कन्या-वचन)

आज पढ़ने के लिए बहुत दिनों से सँजो कर रखी अपने प्रिय चिट्ठों की फीड देखते-देखते वाणी जी की एक प्रविष्टि पर टिप्पणी करने चला । उस प्रविष्टि में वैवाहिक सप्तपदी का उल्लेख था, सरल हिन्दी में उसे प्रस्तुत करने…

Article, Ramyantar, आलेख, प्रसंगवश

आया है प्रिय ऋतुराज …

“वसंत एक दूत है विराम जानता नहीं, संदेश प्राण के सुना गया किसे पता नहीं । पिकी पुकारती रही पुकारते धरा गगन, मगर कभी रुके नहीं वसंत के चपल चरण ।” वसंत प्रकृति का एक अनोखा उपहार है । आधी…

Ramyantar, प्रसंगवश

तेहिं तर ठाढ़ि हिरनियाँ ….

अम्मा गा रही हैं – “छापक पेड़ छिउलिया कि पतवन गहवर हो…” । मन टहल रहा है अम्मा की स्वर-छाँह में । अनेकों बार अम्मा को गाते सुना है, कई बार अटका हूँ, भटका हूँ स्वर-वीथियों में । कितनों को…