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Love Poems

Love Poems, Poetry, Ramyantar

प्रेम-विस्मृति

तुम बैठे रहते हो मेरे पास और टकटकी लगाए देखते रहते हो मुझे, अपने अधर किसलय के एक निःशब्द संक्षिप्त कम्पन मात्र से मौन कर देते हो मुझे और अपने लघु कोमल स्पर्श मात्र से मेरा बाह्यांतर कर लेते हो…

Love Poems, Poetry, Ramyantar

मैं अभी भी खड़ा हूँ

तुम्हें नहीं पता कितनी देर से तुम्हारी राह देख रहा हूँ । तुमने कहा था आने के लिए अंतरतम में अनुरागी दीप जलाने के लिए मुझे बहलाने के लिए और प्रणय के शाश्वत गीत सुनाने के लिए पर तुम नहीं…

Love Poems, Poetry, Ramyantar

अखिल शान्ति है तुम्हारा ध्यान

मैं देखना चाहता हूँ तुम्हें हर सुबह कि मेरा दिन बीते कुछ अच्छी तरह, कि मेरे कल्पना लोक की साम्राज्ञी बनो तुम,कि आतुरता का विहग तुम्हारी स्मृति का विहान देख उड़ चले, कि मेरा विरह-कातर हृदय तुम्हारे दर्शन मात्र से…

Love Poems, Poetry, Ramyantar

तुम बिन बोले (कविता)

बहुत पहले जब अपने को तलाश रहा था एक कविता लिखी थी- कुछ रूमानी- कसक और घबराहट की कविता। शब्द जुटाने आते थे और उस जुटान को मैं कविता कह दिया करता था या कहूं दोस्त कह दिया करते थे।…