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बाबूजी

भोजपुरी, लोक साहित्य

हम तोंहसे कुल बतिया कहली: भोजपुरी कविता

भोजपुरी कविता

हम तोंहसे कुल बतिया कहली सौ बार इहै मंठा महलीकुल गुर गोंइठा भइले पर तूँ दाँतै निपोर के का करबा?  समसै सिवान में खेत खेत के जोड़ रहल बा लगल डगर जइसे छरहरी पतुरिया के करिया कपार पर माँग सुघरभईया एक्कै…

प्रसंगवश

वैवाहिक सप्तपदी: वर वचन

वैवाहिक सप्तपदी: वर वचन हौं गृह-ग्राम रहौं जब लौं तब लौं ही तू साज सिंगार सजौगी।भाँतिन-भाँति के हास-विलास कुतूहल क्रीड़ा में राग रचौगी।पै न रहूँ घर तो न अभूषण पेन्होगी तूँ परधाम रहोगी।प्रानप्रिये ये करो प्रन तूँ हमरी पहली बतिया…

प्रसंगवश

वैवाहिक सप्तपदी: कन्या वचन

वैवाहिक सप्तपदी: कन्या-वचन देवनि देवि अनेकन पूजि कियो जग जीवन पुण्य घना। निज अर्चन वंदन पुण्य-प्रताप ते पायौ तुम्हें अब हौं सजना। तुम सौम्य सदा रहना जो गृहस्थ को जीवन हौ दुख-सुक्ख सना। तब बाम तुम्हारे बिराजुंगी मैं, सजना हमरी…

Audio, भोजपुरी

अर्चना जी ने गाया : सखिया आवा उड़ि चलीं…

इसी ब्लॉग पर मेरी इस प्रविष्टि में मैंने और चारुहासिनी ने एक गीत ’सखिया आवा उडि़ चलीं ओही बनवा हो ना…’ गाया था! मेरे और चारुहासिनी द्वारा गाए युगल गीत को अर्चना चावजी ने अपनी आवाज दी है प्रस्तुत प्रविष्टि…

Audio, Ramyantar

हाय दइया करीं का उपाय…

चारु और मैं इधर संवाद-स्वाद, फिर अवसाद के कुछ क्षणों से गुजरते हुए चारुहासिनी की मनुहार से बाबूजी के लिखे कई गीत यूँ ही गुनगुनाता रहा। अपनी सहेलियों को बाबूजी के लिखे गीतों को गा-गाकर सुनाना और फिर अपनी इस…