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आज मैं एक बार फ़िर हँसा

आजकल मुझे हंसी बहुत आती है, सो आज मैं फ़िर हँसा। अब ‘ज्ञान जी’ की प्रविष्टियों का ‘स्मित हास’, ‘ताऊ’ की प्रविष्टियों का ‘विहसित हास’, आलोक पुराणिक की प्रविष्टियों का ‘अवहसित हास’ भी बार-बार मुझे मेरी हंसी की याद दिला…

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आतंकवाद और साम्प्रदायिकता

भारत की साझी विरासत को लेकर बड़ा चिंतनशील हो चला हूँ। भारत की यह साझी विरासत सम्प्रदायवाद और आतंकवाद के साझे में चली गयी है। कभीं सम्प्रदायवाद बहकता है और किसी न किसी धर्म,सम्प्रदाय के कन्धों पर कट्टरता व धर्मांतरण…

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महाराष्ट्र के शनिदेव बनाम असली शनिदेव

महाराष्ट्र के शनिदेव (राज ठाकरे-Raj Thackeray की बात कर रहा हूँ) हमारे असली शनिदेव से ज्यादा खतरनाक हो गए लगते हैं। बिहारियों, उत्तर भारतीयों पर दृष्टि पड़ी कि वे संकट में पड़े। मामला बहुत कुछ क्षेत्रवाद आदि का नहीं, स्वभाव…

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Sushil Tripathi-सुशील त्रिपाठी व कैमूर की पहाड़ियाँ

सुशील त्रिपाठी को मैं उनकी लिखावट से जानता हूँ । एक बार बनारस में देखा था -पराड़कर भवन में । वह आदमी एक जैसा है- मेरी उन दिनों की स्मृति एवं इन दिनों की श्रद्धांजलि के चित्रों में। चुपचाप उनके…

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संजरपुर या ‘संज्वरपुर’

मैं कौन हूँ ? क्या मुझे संजरपुर का नाम नहीं पता ? आजमगढ़ का एक गाँव जो गलियारे से शयनकक्ष तक अपनी मुचमुचाती हुई अनिद्रित आंखों के साथ लगातार उपस्थित है, शायद वही संजरपुर है। स्वीकृति और अस्वीकृति के मध्य…