Monthly Archives

March 2013

Ramyantar

होली, होली, होली

मुझे वहीं ले चलो मदिर मन जहाँ दिवानों की मस्त टोली  होली, होली, होली। कभी भंग मे, कभी रंग में, कभीं फूल से खिले अंग में कभी राग में, कभी फाग में, कभीं लचक उठती उमंग में पीला कोई गाल…

Ramyantar, नाटक

नल दमयंती -3

पहली एवं दूसरी कड़ी से आगे… नल: (उसकी बाहें पकड़कर सम्हालते हुए तथा आँसू पोंछते हुए) सुकुमारी! रोना अशुभ है, अतः मत रोओ। यदि मेरे अपराध के कारण तुम रो रही हो तो उस अपराध के लिए राजा नल हाथ जोड़कर क्षमा माँगता…

Poetic Adaptation, Ramyantar, Translated Works, सौन्दर्य-लहरी

सौन्दर्य लहरी (छन्द संख्या 41-45)

सौन्दर्य लहरी आदि शंकर की अप्रतिम सर्जना का अन्यतम उदाहरण है। निर्गुण, निराकार अद्वैत ब्रह्म की आराधना करने वाले आचार्य ने शिव और शक्ति की सगुण रागात्मक लीला का विभोर गान किया है सौन्दर्य लहरी में। इस ब्लॉग पर अब…

Ramyantar, Translated Works

निर्वाण षटकम्: आचार्य शंकर

आचार्य शंकर की विशिष्ट कृति सौन्दर्य लहरी के पठन क्रम में इस स्तोत्र-रचना निर्वाण षटकम् से साक्षात हुआ था । सहज और सरल प्रवाहपूर्ण संस्कृत ने इस रचना में निमग्न कर दिया था मुझे। बस पढ़ने के लिए ही हिन्दी…

Poetic Adaptation, Ramyantar, Translated Works, सौन्दर्य-लहरी

सौन्दर्य लहरी (छन्द संख्या 36-40)

सौन्दर्य लहरी संस्कृत के स्तोत्र-साहित्य का गौरव-ग्रंथ व अनुपम काव्योपलब्धि है। आचार्य शंकर की चमत्कृत करने वाली मेधा का दूसरा आयाम है यह काव्य। निर्गुण, निराकार अद्वैत ब्रह्म की आराधना करने वाले आचार्य ने शिव और शक्ति की सगुण रागात्मक…

Ramyantar

ब्राह्मणत्व

ऋग्वेद के दसवें मण्डल के मंत्रों (सूक्त ३०-३४) का रचयिता कवष ऐलुष को माना जाता है। कवष ऐलुष जन्मना शूद्र थे, दासी माँ के बेटे, परन्तु अपनी प्रखर मेधा, अतुल अध्ययन एवं अनुकरणीय आचरण के कारण उन्हें आचार्यत्व प्राप्त हुआ।…