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Poetry, Ramyantar

अनुभव: कुछ सन्दर्भ

एक बाग़ है अनुभव का उसमें खिले हैं कुछ फूल ये फूल बरसों का निदाघ झेल कर बड़े हुए ये फूल समय के शेष नाम हैं । अनुभव का अपना एक पूरा आकाश है उस आकाश में उगा है एक…

Poetry, Ramyantar

क्यों?

क्यों? खो गए हो विकल्प में, चर्चित स्वल्प में विस्मृत सुमधुर अतीत क्यों लेकर चलते हो बेगाना गीत स्वर्ग की ईच्छा क्यों छोड़ दी तुमने आख़िर अनसुलझी, अस्तित्वविहीन अनगिनत कामनाओं की डोर क्यों जोड़ दी तुमने आख़िर क्यों बहक जाते…