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Poetry, Ramyantar

मैं मच्छरदानी नहीं लगाता तो इसका मतलब है …

Mosquito net (Photo credit: quinet) मच्छरदानी लगाना मेरे कस्बे में सुरक्षित व सभ्य होने की निशानी है । मैं मच्छरदानी नहीं लगाता तो इसका मतलब है कि मैं हाईस्कूल की जीव विज्ञान की पुस्तक का सबक भूल गया हूँ ,…

Poetry, Ramyantar

खामोशी हर प्रश्न का जवाब है

Silence – A Fable (Photo credit: thepeachmartini) मुझे नहीं लगता कि खामोशी जवाब नहीं देती। मैं समझता हूँ खामोशी एक तीर्थ है जहाँ हर बुरा विचार अपनी बुराई धो डालता है । ये हो सकता है की तीर्थ के रास्ते…

Poetry, Ramyantar

वास्तविक अन्तिम उपलब्धि

मैं चला था जिंदगी के रास्ते पर मुझे सुख मिला । मैंने कहा,” बड़ी गजब की चीज हो आते हो तो छा जाते हो जीवन में अमृत कण बरसाने लगते हो, सूर्य का उगना दिखाते हो झरनों का गिरना, नदियों…

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

अभी तक मैं चल रहा हूँ, चलता ही जा रहा हूँ

(१) “बहुत दूर नहीं बहुत पास “ कहकर तुमने बहका दिया मैं बहक गया । (२) “एक,दो,तीन…..नहीं शून्य मूल्य-सत्य है “ कहा फिर अंक छीन लिए मैं शून्य होकर विरम गया । (३) तुम हो जड़ों के भीतर, वृन्त पर…

Poetry, Ramyantar

अब तुम कहाँ हो मेरे वृक्ष ?

छत पर झुक आयी तुम्हारी डालियों के बीच देखता कितने स्वप्न कितनी कोमल कल्पनाएँ तुम्हारे वातायनों से मुझ पर आकृष्ट हुआ करतीं, कितनी बार हुई थी वृष्टि और मैं तुम्हारे पास खड़ा भींगता रहा कितनी बार क्रुद्ध हुआ सूर्य और…

Poetry, Ramyantar

मेरी दीवार में एक छिद्र है

मेरी दीवार में एक छिद्र है उस छिद्र में संज्ञा है, क्रिया है, विशेषण है। जब भी लगाता हूँ अपनी आँख उस छिद्र से सब कुछ दिखाई देता है जो है दीवार के दूसरी ओर। दीवार के दूसरी ओर बच्चे…

Poetry, Ramyantar

गद्य से उभारनी पड़ रही है बारीक-सी कविता

छंदों से मुक्त हुए बहुत दिन हुए कविता ! क्या तुम्हारी साँस घुट सी नहीं गई ? मैंने देखा है मुझे डांटती हुई माँ की डांट पिता की रोकथाम पर झल्लाहट बन जाती है टूट जाता है उस डांट का…

Poetry, Ramyantar

जो कर रहा है यहाँ पुरुष

राजकीय कन्या महाविद्यालय के ठीक सामने संघर्ष अपनी चरमावस्था में है, विद्रूप शब्दों से विभूषित जिह्वा सत्वर श्रम को तत्पर है, कमर की बेल्ट हवा में लहरा रही है और खोज रही है अपना ठिकाना , तत्क्षण ही बह आयी…

Poetry, Ramyantar

कागजों में चित्र

बहुत पहले एक आशु कविता प्रतियोगिता में इस कविता ने दूसरी जगह पाई थी। प्रतियोगी अधिक नहीं थे, प्रतियोगिता भी स्थानीय थी, पर पुरस्कार का संतोष इस कविता के साथ जुड़ा रहा है। कविता ज्यों कि त्यों लिख रहा हूँ-…

Poetry, Ramyantar

रो उठे तुम!

रोने का एक दृश्य आंखों में भर गया । एक लडकी थी,रो रही थी । किसी ने उससे उसका हाथ मांग लिया था। प्यार जो करता था वह। लडकी रो उठी। अजीब-सा वैपरीत्य था। यह छटपटाहट थी या असहायता-पता नहीं।…