प्रेम पत्रों का प्रेमपूर्ण काव्यानुवाद: छ:

इस छलना में पड़ी रहूँ
यदि तेरा कहना एक छलावा।

तेरे शब्द मूर्त हों नाचें
मैं उस थिरकन में खो जाऊँ
तेरी कविता की थपकी से
मेरे प्रियतम मैं सो जाऊँ
अधर हिलें मैं प्राण वार दूँ
यदि उनका हिलना एक छलावा।

प्रिय तेरे इस भाव-जलधि में
मैं डूबी, बस डूबी जाऊँ
तेरी रसना के बन्धन से
मैं असहज हो बंधती जाऊँ
इन आंखों पर जग न्यौछावर
यदि इनका खुलना एक छलावा।

सारी चाह हुई है विस्मृत
केवल एक अभिप्सित तू है
प्रेम-उदधि मेरे प्राणेश्वर
मेरा हृदय-नृपति तो तू है
प्रतिक्षण मिलन-गीत ही गाऊँ
यदि तेरा मिलना एक छलावा।

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Last Update: June 20, 2026

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