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October 2009

Ramyantar

नमन् अनिर्वच ! (गांधी-जयंती पर विशेष )

पूर्व और पश्चिम की संधि पर खड़े युगपुरुष ! तुम सदैव भविष्योन्मुख हो, मनुष्यत्व की सार्थकता के प्रतीक पुरुष हो, तुम घोषणा हो मनुष्य के भीतर छिपे देवत्व के और तुम राष्ट्र की भाव-प्रसारिणी प्रवृत्तियों का विस्तरण हो । अहिंसा…

Ramyantar

कौतूहल एक धुआँ है..

कौतूहल एक धुआँ है उपजता है तुम्हारी दृष्टि से, मैं उसमें अपनी आँखे मुचमुचाता प्रति क्षण प्रवृत्त होता हूँ आगत-अनागत के रहस लोक में समय की अनिश्चित पदावली मेरी चेतना का राग-रंग हेर डालती है जो निःशेष है वह ध्वनि…