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Poetry

Love Poems, Poetry, Ramyantar

मैं अभी भी खड़ा हूँ

तुम्हें नहीं पता कितनी देर से तुम्हारी राह देख रहा हूँ । तुमने कहा था आने के लिए अंतरतम में अनुरागी दीप जलाने के लिए मुझे बहलाने के लिए और प्रणय के शाश्वत गीत सुनाने के लिए पर तुम नहीं…

Love Poems, Poetry, Ramyantar

अखिल शान्ति है तुम्हारा ध्यान

मैं देखना चाहता हूँ तुम्हें हर सुबह कि मेरा दिन बीते कुछ अच्छी तरह, कि मेरे कल्पना लोक की साम्राज्ञी बनो तुम,कि आतुरता का विहग तुम्हारी स्मृति का विहान देख उड़ चले, कि मेरा विरह-कातर हृदय तुम्हारे दर्शन मात्र से…

Poetry, Ramyantar, Verse

भिखारी: नख-शिख वर्णन

कुछ दिनों पहले एक भिक्षुक ने दरवाजे पर आवाज दी। निराला का कवि मन स्मृत हो उठा। वैसी करुणा का उद्वेग तो हुआ, पर व्यवस्था के प्रति आक्रोश ने शब्द का चयन बदल दिया। क्षमा के साथ। कुछ कहेंगे इस…

Poetry, Ramyantar, Verse Free

कागजों में चित्र

बहुत पहले एक आशु कविता प्रतियोगिता में इस कविता ने दूसरी जगह पाई थी। प्रतियोगी अधिक नहीं थे, प्रतियोगिता भी स्थानीय थी, पर पुरस्कार का संतोष इस कविता के साथ जुड़ा रहा है। कविता ज्यों कि त्यों लिख रहा हूँ-…

Poetry, Ramyantar, Verse Free

रो उठे तुम!

रोने का एक दृश्य आंखों में भर गया । एक लडकी थी,रो रही थी । किसी ने उससे उसका हाथ मांग लिया था। प्यार जो करता था वह। लडकी रो उठी। अजीब-सा वैपरीत्य था। यह छटपटाहट थी या असहायता-पता नहीं।…

Poetry, Ramyantar

एक आदमी, एक गुरु- हाँ, हाँ, ना,ना

मैंने तुम्हें औरतों से बतियाते कभीं नहीं देखा और न ही -मर्दों से ऐसा सुना- किसी औरत ने बड़ी अदब से तुम्हारा नाम लिया अक्सर उन औरतों से जिनका पैर तुम छूते रहे हो (अब तुम्हें क्यों इसकी जरूरत पड़ीं,नहीं…

Poetry, Ramyantar, Verse Free

अनुभव: कुछ सन्दर्भ

एक बाग़ है अनुभव का उसमें खिले हैं कुछ फूल ये फूल बरसों का निदाघ झेल कर बड़े हुए ये फूल समय के शेष नाम हैं । अनुभव का अपना एक पूरा आकाश है उस आकाश में उगा है एक…

Poetic Adaptation, Poetry, Ramyantar, Verse

समय पखेरू है भागते समय को पकड़ो

अमेरिकी दार्शनिक कवि इमरसन (Ralph Waldo Emerson) का एक प्रसंग पढ़ रहा था । समय की अर्थवत्ता को ध्वनित करता यह प्रसंग बहुत दूर तक प्रासंगिक लगा। कविता का संस्कार है। अपने छोटे से भतीजे को ग्राह्य बनाने हेतु उस…

Poetry, Ramyantar, Verse Free

क्यों?

क्यों? खो गए हो विकल्प में, चर्चित स्वल्प में विस्मृत सुमधुर अतीत क्यों लेकर चलते हो बेगाना गीत स्वर्ग की ईच्छा क्यों छोड़ दी तुमने आख़िर अनसुलझी, अस्तित्वविहीन अनगिनत कामनाओं की डोर क्यों जोड़ दी तुमने आख़िर क्यों बहक जाते…

Love Poems, Poetry, Ramyantar, Verse

तुम बिन बोले (कविता)

बहुत पहले जब अपने को तलाश रहा था एक कविता लिखी थी- कुछ रूमानी- कसक और घबराहट की कविता। शब्द जुटाने आते थे और उस जुटान को मैं कविता कह दिया करता था या कहूं दोस्त कह दिया करते थे।…