Category

Ramyantar

Ramyantar, Translated Works

नये साल में रामजी…

उल्लास की संभावनायें लेकर आता है नववर्ष । न जाने कितनी शुभाकांक्षायें, स्वप्न, छवियाँ हम सँजोते हैं मन में नये वर्ष के लिये । अनगिन मधु-कटु संघात समोये अन्तस्तल में विगत वर्ष का विहंग उड़ जाता है शून्य-गगन में ।…

Ramyantar

शायद, आज मैं मिलूँगा तुमसे !

आज सुबह धूप जल्दी आ गयी नन्दू चच्चा को महीने भर का काम मिल गया छप्पर दुरुस्त हो गया आज बगल वाली शकुन्तला का “सर्दी नहीं पड़ेगी” की भविष्यवाणी फेल हो गयी – पन्ना बाबा चहक उठे रेखवा की अम्मा…

Ramyantar, नाटक, बुद्ध

करुणावतार बुद्ध : आठ

करुणावतार बुद्ध- 1, 2, 3, 4, 5 ,6, 7 के बाद प्रस्तुत है आठवीं कड़ी… ब्राह्मण: इतनी विकलता क्यों वैरागी? परास्त पौरुष और आत्मघाती अधैर्य के वशीभूत क्यों हो गये? तुम्हारा मन तो जैसे नदी के दूसरी ओर के अँधियार…

Ramyantar

अधूरी कविता …

एक पन्ना मिला । पन्ने पर फरवरी २००७ लिखा है, इसलिये लगभग तीन साल पहले की एक अधूरी कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ । अधूरी इसलिये कि उस क्षण-विशेष की संवेदना और भाव-स्थिति से अपने को जोड़ नहीं पा रहा…

Ramyantar, नाटक, बुद्ध

करुणावतार बुद्ध : सात

करुणावतार बुद्ध- 1, 2, 3, 4, 5 ,6 के बाद प्रस्तुत है सातवीं कड़ी- पंचम दृश्य (राजकुमार सिद्धार्थ गहन निराशा और विषाद के बोझ में दबे मंथर गति बढ़े जा रहे हैं। स्थान अज्ञात, दिशा अज्ञात और लक्ष्य अप्राप्त है। अभी…

Poetic Adaptation, Ramyantar, Translated Works, सौन्दर्य-लहरी

सौन्दर्य लहरी

सौन्दर्य लहरी संस्कृत के स्तोत्र-साहित्य का गौरव-ग्रंथ व अनुपम काव्योपलब्धि है। आचार्य शंकर की चमत्कृत करने वाली मेधा का दूसरा आयाम है यह काव्य। निर्गुण, निराकार अद्वैत ब्रह्म की आराधना करने वाले आचार्य ने शिव और शक्ति की सगुण रागात्मक लीला…

Ramyantar, प्रसंगवश

तेहिं तर ठाढ़ि हिरनियाँ ….

अम्मा गा रही हैं – “छापक पेड़ छिउलिया कि पतवन गहवर हो…” । मन टहल रहा है अम्मा की स्वर-छाँह में । अनेकों बार अम्मा को गाते सुना है, कई बार अटका हूँ, भटका हूँ स्वर-वीथियों में । कितनों को…

Ramyantar, नाटक, बुद्ध

करुणावतार बुद्ध – छ:

करुणावतार बुद्ध- १, २, ३, 4, 5 के बाद प्रस्तुत है छठीं कड़ी- करुणावतार बुद्ध सिद्धार्थ: यह कौन-सा अतलान्त स्पर्श मेरे मन-प्राणों को छूकर चला गया है! यह कैसा मृदुल स्पर्श मेरे सिर को शीतलता प्रदान कर रहा है!  यह…

Ramyantar

स्वर अपरिचित …

बीती रात मैंने चाँद से बातें की । बतियाते मन उससे एकाकार हुआ । रात्रि  के सिरहाने खड़ा चाँद तनिक निर्विकार हुआ , बोला – “काल का पहिया न जाने कितना घूमा न जाने कितनी राहें मैं स्वयं घूमा और…