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Ramyantar

Ramyantar

गुरु की पाती –

शिक्षक-दिवस पर प्रस्तुत कर रहा हूँ ’हेनरी एल० डेरोजिओ”(Henry L. Derozio) की कविता ’To The Pupils’ का भावानुवाद – मैं निरख रहा हूँ नव विकसनशील पुष्प-पंखुड़ियों-सा सहज, सरल मंद विस्तार तुम्हारी चेतना, तुम्हारे मस्तिष्क का, और देख रहा हूँ शनैः…

Ramyantar

इस तरह नष्ट होती है वासना !

मेरा एक विद्यार्थी ! या और भी कुछ । कई सीमायें अतिक्रमित हो जाती हैं । आज निश्चित अंतराल पर की जाने वाली खोजबीन से उसकी एक चिट्ठी मिली । घटना-परिघटना से बिलकुल विलग रखते हुए आपके सम्मुख लिख रहा…

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मलहवा बाबा फिर आ गये …

ढोलक  टुनटुनाते हुए, इस वर्ष भी गाते हुए बाबा आ गये । हमने कई बार अपना ठिकाना बदला- दो चार किराये के घर, फिर अपना निजी घर; बहुतों की संवेदना बदली- पर बाबा आते रहे । मैं उन्हें मलहवा बाबा…

Ramyantar, Religion and Spirituality

कई बार निर्निमेष अविरत देखता हूँ उसे

कई बार निर्निमेष अविरत देखता हूँ उसे यह निरखना उसकी अन्तःसमता को पहचानना है मैं महसूस करता हूँ नदी बेहिचक बिन विचारे अपना सर्वस्व उड़ेलती है फिर भी वह अहमन्य नहीं होता सिर नहीं फिरता उसका; उसकी अन्तःअग्नि, बड़वानल दिन…

Ramyantar, कहानी

एक शान्त मन ही व्रती होता है …

आजकल एक किताब पढ़ रहा हूँ – ’आचार्य क्षेमेन्द्र की औचित्य-दृष्टि’ । किताब बहुत पुरानी है – आवरण के पृष्ठ भी नहीं हैं, इसलिये लेखक का नाम न बता सकूँगा । इस पुस्तक में लेखक की भाषा और शैली के…

Ramyantar

दिनों दिन सहेजता रहा बहुत कुछ …

(१)दिनों दिन सहेजता रहा बहुत कुछजो अपना था, अपना नहीं भी था,मुट्ठी बाँधे आश्वस्त होता रहाकि इस में सारा आसमान है;बाद में देखा,जिन्हें सहेजता रहा क्षण-क्षणउसका कुछ भी शेष नहीं,हाँ, जाने अनजाने बहुत कुछलुटा दिया था मुक्त हस्त-वह साराद्विगुणित होकर…

Ramyantar

मैं समर्पित साधना की राह लूँगा…

मुझसे मेरे अन्तःकरण का स्वत्वगिरवी न रखा जा सकेगाभले ही मेरे स्वप्न,मेरी आकांक्षायेंसौंप दी जाँय किसी बधिक के हाँथों कम से कम का-पुरुष तो न कहा जाउंगाऔर न ऐसा दीप हीजिसका अन्तर ही ज्योतिर्मय नहीं,फिर भले हीखुशियाँ अनन्त काल के…

Ramyantar, वृक्ष-दोहद

सुरूपिणी की मुख मदिरा से सिंचकर खिलखिला उठा बकुल (वृक्ष-दोहद के बहाने वृक्ष-पुष्प चर्चा)

कवि समय की प्रसिद्धियों में अशोक वृक्ष के साथ सर्वाधिक उल्लिखित प्रसिद्धि है बकुल वृक्ष का कामिनियों के मुखवासित मद्य से विकसित हो उठना। बकुल वर्षा ऋतु में खिलने वाले पुष्पों मे कदम्ब के पश्चात सर्वाधिक उल्लेखनीय़ पुष्प है। हिन्दी…