कहाँ भूल गया जीवन का राग, मेरे साथी सलोने ।
क्यों रूठ गया अपना यह भाग, मेरे साथी सलोने।

कैसे जतन से ये जीवन सजाया
पड़ गयी उस पर भी बैरन की छाया
मेरा सूख गया लहराता फाग, मेरे साथी सलोने ।

क्षण में जो विहँसा था अब मुरझाया
सुमन सजीला गया था भरमाया
सोया कब तक रहेगा तू जाग, मेरे साथी सलोने ।

माना कि आँखों से आँसू बहेंगे
आँसू ही दुःख की कथाएँ कहेंगे
पर बुझ ना सकेगा चिराग, मेरे साथी सलोने ।

हम दृष्टि पथ से विलग हो जाएँ
अपनी विकलता विकल कर जाएँ
है अमर ये सजल अनुराग, मेरे साथी सलोने ।