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Ramyantar

Poetry, Ramyantar

एक गाँव

सड़क उसके बीच से गुजरती है गुजरते हैं सड़क पर चलने वाले लोग पर थोड़ा ठहर जाते हैं, दम साध कर खड़ा है वह कुछ तो आकर्षण है उसमें कि सड़क से गुजरने वाला हर आदमी ठहर कर निरख ही…

Poetry, Ramyantar

वहाँ भी डाकिया होगा?

enveloppen (Photo credit: Wikipedia) क्यों ऐसा होता था कि डाकिया रोज आता था पर तुम्हारा लिखा हुआ पत्र नहीं लाता था। क्यों ऐसा होता था कई बार कि जब भी मैंने डाकिये से माँगा तुम्हारा पत्र उसने थमा दिये मनीआर्डर…

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

और ……अंधेरा

(Photo credit: MarianOne) आज फिर एक चहकता हुआ दिन गुमसुमायी सांझ में परिवर्तित हो गया, दिन का शोर खामोशी में धुल गया, रात दस्तक देने लगी। हर रोज शायद यही होता है फिर खास क्या है? शायद यही, कि मेरे…

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

छोटी सी कविता

विश्वास के घर में अमरुद का एक पेंड़ था एक दिन उस पेंड़ की ऊँची फ़ुनगी पर एक उल्लू बैठा दिखा, माँ ने कहा- ‘उल्लू’ पिता ने कहा- ‘अशुभ, अपशकुन’, फ़िर पेंड़ कट गया। अब, उल्लू तीसरी मंजिल की मुंडेर…

Poetry, Ramyantar, Songs and Ghazals

अब तो चले जाना है

Marigold (Photo credit: soul-nectar) कहता है विरहित मन, कर ले तू कोटि जतन रुकना अब हाय नहीं, अब तो चले जाना है । छूटेंगे अखिल सरस, सुख के दिन यों पावस हास कहीं रूठेगा, बोलेगा बस-बस-बस दिन में अन्धेरा अब…

Poetry, Ramyantar

बस में बैठी एक युवती

Woman (Source: in.com) देखा मैंने, चल रही थी ‘बस’। विचार उद्विग्न हो आये विस्तार के लिये संघर्ष कर रहे संकीर्ण जल की भाँति। आगे की दो सीटें सुरक्षित- प्रतिनिधित्व का दिलाने को विश्वास और दशा उस प्रतिनिधि की- अवगुंठित, संकुचित…

Ramyantar

कृपया मेरे नये फीड को सबस्क्राइब करिए

‘आशीष जी‘ से पूछकर अपने ब्लॉग ‘नया प्रयत्न‘ को इस ब्लॉग में विलयित कर चुका हूँ । मेरी पोस्ट को फीड से पढ़ने वाले लोगों तक मेरी नयी फीड पहुँची ही नहीं । परिणामतः एक भी कमेन्ट नही आया –…

Poetry, Ramyantar, Songs and Ghazals

मेरी समझ नहीं कि ये कमाल कर सकूँ

हर शख्स अपने साथ मैं खुशहाल कर सकूँ मेरी समझ नहीं कि ये कमाल कर सकूँ। फैली हैं अब समाज में अनगिन बुराइयाँ है लालसा कि बद को मैं बेहाल कर सकूँ। फेकूँ निकाल हिय के अन्धकार द्वेष को कटुता…