Category

Ramyantar

Ramyantar, वृक्ष-दोहद

सुरूपिणी की मुख मदिरा से सिंचकर खिलखिला उठा बकुल (वृक्ष-दोहद के बहाने वृक्ष-पुष्प चर्चा)

कवि समय की प्रसिद्धियों में अशोक वृक्ष के साथ सर्वाधिक उल्लिखित प्रसिद्धि है बकुल वृक्ष का कामिनियों के मुखवासित मद्य से विकसित हो उठना। बकुल वर्षा ऋतु में खिलने वाले पुष्पों मे कदम्ब के पश्चात सर्वाधिक उल्लेखनीय़ पुष्प है। हिन्दी…

Ramyantar

जल ही जीवन का सम्बल है

अप् सूक्त : [जल देवता ]ऋचा –शं नो देवीर् अभिष्टय आपो भवन्तु पीतयेशं योर् अभिस्रवन्तु नः ….- –ऋग्वेद —————————————– जल ज्योतिर्मय वह आँचल हैजहाँ खिला –वह सृष्टि कमल हैजल ही जीवन का सम्बल है । ’आपोमयं’ जगत यह सारायही प्राणमय…

Ramyantar, Religion and Spirituality

पर्यावरण के प्रति प्रेम का अनूठा प्रतीक-बंधन

राखी बीत गयी । बहुत कुछ देखा, सुना, अनुभूत किया – पर एक दृश्य अनावलोकित रह गया, एक अनुभव फिसल गया । मेरे कस्बे सकलडीहा के बहुत नजदीक के एक गाँव की दो बच्चियों ने रक्षाबंधन पर राखी बाँधी ,…

Blog & Blogger, Hindi Blogging, Ramyantar

मैं चिट्ठाकार हूँ, पर…

मैं चिट्ठाकार हूँ, पर अनूप शुक्ल जैसा तो नहीं , जिनकी लेखनी उनके प्राचुर्य का प्रकाश है । यह प्राचुर्य का प्रभाव ही है न, जिससे मानव अपने को अभिव्यक्त करता है । वह अपने को बहुतों में, क्षुद्र को…

Audio, Ramyantar

मैथिली शरण गुप्त के जन्मदिवस (3 अगस्त) पर

हिन्दी साहित्य के उज्ज्वल नक्षत्र राष्ट्रकवि श्री मैथिलीशरण गुप्त का जन्मदिवस है कल। प्रस्तुत है उनका प्रसिद्ध और विख्यात गीत, ’सखि वे मुझसे कह कर जाते!’ – पढ़े भी और सुनें भी। सखि, वे मुझसे कहकर जाते, कह, तो क्या…

Ramyantar, कहानी

’गमी’ – प्रेमचंद के जन्मदिवस पर

सर्वकालिक महानतम हिन्दी उपन्यासकार और कहानीकार प्रेमचन्द के जन्मदिवस पर प्रस्तुत है उनकी एक रोचक कहानी – मुझे जब कोई काम – जैसे बच्चों को खिलाना, ताश खेलना,, हारमोनियम बजाना, सड़क पर आने जाने वालों को देखना – नहीं होता…

Ramyantar

तुम्हें कौन प्यार करता है ?

हे प्रेम-विग्रह !एक द्वन्द्व है अन्तर्मन में,दूर न करोगे ? मेरी चेतना के प्रस्थान-बिन्दु परआकर विराजो, स्नेहसिक्त !कि अनमनेपन से निकलकर मैं जान सकूँ कि तुम्हें प्यार कौन करता है ? क्या वह जो अपने प्राणों की वेदी परप्रतिष्ठित करता…

Ramyantar

तुम्हारी याद आती है चले आओ, चले आओ (तुलसी जयंती पर तुलसी-स्मरण )

आज तुलसी जयंती है । इन पंक्तियों के साथ इस विराट पुरुष का स्मरण कर रहा हूँ – अहो, नंदन विपिन की विटप छाया में विराजित कविमुरलिका बन्द कर दो छेड़ना अब रुद्र रव लाओप्रलय है पल रहा हर घर…

Ramyantar, वृक्ष-दोहद

सुकुमारी ने छुआ और खिल उठा प्रियंगु (वृक्ष-दोहद के बहाने वृक्ष-पुष्प चर्चा)

प्रियंगु! यथा नाम तथा गुण। काव्य रसिकों और औषधि विज्ञानियों दोनों का प्रिय। कालिदास इसकी सुगंध के सम्मोहन में हैं। ऋतुसंहार में सुगंधित द्रव्यों के साथ इस पुष्प का वर्णन है। चरक जैसे औषधि विज्ञानी भी इसे खूब चाहते हैं।…