आओ चलो, दीप रखते हैं (कविता)
आओ चलो, दीप रखते हैं कविता जीवन के हर उस कोने…
Arattai – संदेश और संवाद माध्यमों का स्वदेशी संस्करण
आत्मनिर्भर भारत के गुंजित स्वर में प्रधानमंत्री के स्वदेशी अपनाने के…
आशीष त्रिपाठी का काव्य संग्रह शान्ति पर्व
शान्ति पर्व पढ़ गया। किसी पुस्तक को पढ़ कर चुपचाप मन…
नवागत प्रविष्टियाँ
आओ करें, कुछ दीवानगी की बातें
न समझने की ये बातें हैं, न समझाने कीजिंदगी उचटी हुई नींद है दीवाने की। पढ़ कर कई बार सोचता…
जहाँ रुका है मन आँखें भी रुक रह जातीं
आँखें अपरिसीम हैं, संसृति का आधार है बिना दृष्टि का सृष्टि निवासी निराधार। ऑंखें बोती हैं देह-भूमि पर प्रेम-बीज इन…
कवि, प्रेमी और पक्षी विशेषज्ञ
आज सुबह एक कविता पढ़ी- कवि, प्रेमी और पक्षी विशेषज्ञ (Poet, Lover, Birdwatcher)। कविता ने बाँध लिया क्योंकि यह कमोबेश…
मेरा अकेलापन और रचना का सत्य सूत्र
मैं लिखने बैठता हूँ, यही सोचकर की मैं एक परम्परा का वाहक होकर लिख रहा हूँ। वह परम्परा कृत्रिमता से…
हिन्दी ब्लॉग टिप्स- किसी हिन्दी चिट्ठे के सौ प्रशंसक होने का मतलब
आज की लेखनी (या उसे चिट्ठाकारी कहिये) का गुण है कि वह पठनीय हो कि जटिलताओं के अवकाश को भरने…
मस्ती की लुकाठी लेकर चल रहा हूँ
मैं यह सोचता हूँ बार-बार की क्यों मैं किसी जीवन-दर्शन की बैसाखी लेकर रोज घटते जाते अपने समय को शाश्वत…

