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नवागत प्रविष्टियाँ

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जहाँ रुका है मन आँखें भी रुक रह जातीं

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

आँखें अपरिसीम हैं, संसृति का आधार है बिना दृष्टि का सृष्टि निवासी निराधार। ऑंखें बोती हैं देह-भूमि पर प्रेम-बीज इन…

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मेरा अकेलापन और रचना का सत्य सूत्र

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

मैं लिखने बैठता हूँ, यही सोचकर की मैं एक परम्परा का वाहक होकर लिख रहा हूँ। वह परम्परा कृत्रिमता से…

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हिन्दी ब्लॉग टिप्स- किसी हिन्दी चिट्ठे के सौ प्रशंसक होने का मतलब

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

आज की लेखनी (या उसे चिट्ठाकारी कहिये) का गुण है कि वह पठनीय हो कि जटिलताओं के अवकाश को भरने…