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Contemplation, Ramyantar, चिंतन

शिशिर-बाला

साढ़े छः बजे हैं अभी । नींद खुल गयी है पूरी तरह । पास की बन्द खिड़की की दरारों से गुजरी हवा सिहरा रही है मुझे । ओढ़ना-बिछौना छोड़ चादर ले बाहर निकलता हूँ । देखता हूँ आकाश किसी बालिका…

Ramyantar

जितनी मेरी बिसात है काम आ रहा हूँ मैं ….

क्या कहेंगे आप इसे ? संघर्ष ? समर्पण ? निष्ठा ? जिजीविषा ? आसक्ति ? या एक धुन ? मैं निर्णय नहीं कर पा रहा । चित्र तो देख रहे होंगे आप। उसमें रात है, अंधेरा भी । उस अंधेरे…

Ramyantar

सब कुछ अदभुत …

अद्भुत छलाँग । अद्भुत फिल्मांकन । अद्भुत प्रस्तुति । यहाँ देखा, इच्छा हुई, साभार प्रस्तुत है –

Ramyantar

इस तरह नष्ट होती है वासना !

मेरा एक विद्यार्थी ! या और भी कुछ । कई सीमायें अतिक्रमित हो जाती हैं । आज निश्चित अंतराल पर की जाने वाली खोजबीन से उसकी एक चिट्ठी मिली । घटना-परिघटना से बिलकुल विलग रखते हुए आपके सम्मुख लिख रहा…

Article, Contemplation, Literary Classics, Ramyantar, चिंतन

“मगर सूर्य को क्यूं लपेटा” ?

अपनी पिछली प्रविष्टि (हे सूर्य : कविता – कामाक्षीप्रसाद चट्टोपाध्याय) पर अरविन्द जी की टिप्पणी पढ़कर वैसे तो ठहर गया था, पर बाद में मन ने कहा कि कुछ बातें इस प्रविष्टि के संदर्भ करना जरूरी है, क्योंकि लगभग यही…

Ramyantar

आप बतायें मुझे

कल आम खाते हुए मेरी भतीजी ने मुझसे पूछा – “फलों का राजा तो आम है । फलों की रानी कौन है ? ” मैं निरुत्तर, जवाब कहाँ ढूँढ़ता – आ गया आपके पास । आप बतायें मुझे ।

Ramyantar

नर्गिस की बेनूरी या “गुण ना हेरानो गुणगाहक हेरानो हैं”

इस हिन्दी चिट्ठाकारी में कई अग्रगामी एवं पूर्व-प्रतिष्ठित चिट्ठाकारों की प्रविष्टियाँ सदैव आकृष्ट करती रहतीं हैं कुछ न कुछ लिखने के लिये । मेरे लेखन का सारा कुछ तो इस चिट्ठाजगत के निरन्तर सम्मुख होते दृश्य के साथ निर्मित होता/अनुसरित…

Ramyantar

उसने चिट्टी इस प्रकार लिखी

आज कुछ और नहीं, मेरे मित्र का मेरी ऑर्कुट स्क्रैपबुक में लिखा स्क्रैप पोस्ट कर रहा हूँ । एक गांव में एक स्त्री थी । उसके पती आई आई टी मे कार्यरत थे । वह अपने पति को पत्र लिखना…

Ramyantar

दीपावली बीत गयी तो क्या

दीपावली की बधाई देते हुए अपने एक फौजी मित्र को शुभकामना-पत्र भेंजा था । आज वह मुझ तक वापस आ गया । पता नहीं मिला, या पहुंच न सका, पता नहीं । मैंने सोचा उसे यहाँ पोस्ट करुँ । भाव…