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Environment, Ramyantar, Vriksha Dohad, वृक्ष-दोहद

रमणी के नर्म वाक्यों से फूल उठा मंदार (वृक्ष-दोहद के बहाने वृक्ष-पुष्प चर्चा )

मुझे क्षण-क्षण मुग्ध करती, सम्मोहित करती वृक्ष दोहद की चर्चा जारी है। कैसा विश्वास है कि वयःसंधि में प्रतिबुद्ध कोई बाला यदि बायें पैर से अशोक को लताड़ दे (मेंहदी लगाकर), या झुकती आम्र-शाख पर तरुण निःश्वांस छोड़ दे, स्मित…

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सुरूपिणी की मुख मदिरा से सिंचकर खिलखिला उठा बकुल (वृक्ष-दोहद के बहाने वृक्ष-पुष्प चर्चा)

कवि समय की प्रसिद्धियों में अशोक वृक्ष के साथ सर्वाधिक उल्लिखित प्रसिद्धि है बकुल वृक्ष का कामिनियों के मुखवासित मद्य से विकसित हो उठना। बकुल वर्षा ऋतु में खिलने वाले पुष्पों मे कदम्ब के पश्चात सर्वाधिक उल्लेखनीय़ पुष्प है। हिन्दी…

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सुकुमारी ने छुआ और खिल उठा प्रियंगु (वृक्ष-दोहद के बहाने वृक्ष-पुष्प चर्चा)

प्रियंगु! यथा नाम तथा गुण। काव्य रसिकों और औषधि विज्ञानियों दोनों का प्रिय। कालिदास इसकी सुगंध के सम्मोहन में हैं। ऋतुसंहार में सुगंधित द्रव्यों के साथ इस पुष्प का वर्णन है। चरक जैसे औषधि विज्ञानी भी इसे खूब चाहते हैं।…

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सुन्दरियों के गान से विकसित हुआ नमेरु (वृक्ष-दोहद के बहाने वृक्ष-पुष्प चर्चा)

स्त्रियोचित प्रतिभाओं में सर्वाधिक प्रशंसित और आकर्षित करने वाली प्रतिभा उनका मधु-स्वर-संपृक्त होना है। स्त्री का मधुर स्वर स्वयं में अनन्त आनन्द का निर्झर-स्रोत है। यह अनावश्यक नहीं कि वृक्ष-दोहद की महत्वपूर्ण क्रिया जो अनेक स्त्री-क्रिया-व्यवहारों से सम्पन्न होती हो…

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शुभे! मृदु-हास्य से चम्पक खिला दो (वृक्ष-दोहद के बहाने वृक्ष-पुष्प चर्चा)

यह देखिये कि बूँदे बरसने लगीं हैं, सूरज की चातुरी मुंह छुपा रही है और ग्रीष्म ने हिला दिये हैं अपने हाँथ और इधर मैं हूँ कि ग्रीष्म के कनकवर्णी चम्पक को ही विस्मृत किये बैठा हूँ। यह कैसे संभव…

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रूपसी गले मिलो! कि कुरबक फूल उठे (वृक्ष-दोहद के बहाने वृक्ष-पुष्प चर्चा)

यूँ तो अनगिनत पुष्प-वृक्षों को मैंने जाना पहचाना नहीं, परन्तु वृक्ष-दोहद के सन्दर्भ में ’कुरबक’ का नाम सुनकर मन में इस पुष्प के प्रति सहज ही उत्कंठा हो गयी। मैंने इसे पहचानने का प्रयास किया। प्रथमतः जैसा कुछ ग्रंथों में…

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फूलो अमलतास ! सुन्दरियाँ थिरक उठी हैं (वृक्ष-दोहद के बहाने वृक्ष-पुष्प चर्चा)

स्वर्ण-पुष्प वृक्ष की याद क्यों न आये इस गर्मी में। कौन है ऐसा सिवाय इसके जो दुपहरी से उसकी कान्ति चुराकर दुपहर से भी अधिक तीव्रता से चमक उठे और सारा जीवन सारांश अभिव्यक्त करे। वह कौन-सी जीवनी शक्ति है…

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रमणियों की ठोकर से पुष्पित हुआ अशोक (वृक्ष-दोहद के बहाने वृक्ष-पुष्प चर्चा )

वृक्ष-दोहद की संकल्पना के पीछे प्रकृति के साथ मनुष्य का वह रागात्मक संबंध है जिससे प्रेरित होकर अन्यान्य मानवीय क्रिया-कलाप वृक्ष-पादपों पर आरोपित कर दिये जाते रहे हैं। प्रकृति के साथ मनुष्य के  यह रागात्मक सम्बन्ध वस्तुतः उसके आनन्द को…

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वृक्ष-दोहद के बहाने वृक्ष-पुष्प चर्चा: कवि प्रसिद्धियाँ व कवि समय

साहित्य के अन्तर्गत ’कवि-समय’ का अध्ययन करते हुए अन्यान्य कवि समयों के साथ ’वृक्ष-दोहद’ का जिक्र पढ़कर सहित्य की विराटता देखी। वृक्ष-दोहद का अर्थ वृक्षों में पुष्पोद्गम से है। यूँ तो दोहद का अर्थ गर्भवती की इच्छा है, पर वृक्ष…