सच्चा शरणम्
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बड़ा लागै नीक सखी ना ..(कजरी 2)

श्याम हसलैं बोललैं बइठ के नजदीक सखी
बड़ा लागै नीक सखी ना ॥

चमकै लिलरा जस अँजोरिया
दमकै बिजुरी अस दँतुरिया,
मोहे अधरन कि लाल लाल लीक सखी
बड़ा लागै नीक सखी ना ।

बड़री अँखिया कै पुतरिया
मुख पै लटके लट लटुरिया,
जइसे धाये मधु के लोभी चंचरीक सखी
बड़ा लागै नीक सखी ना ।

धइके दूनों मोर कलइया
लगलैं थिरकै सखि कन्हइया,
जइसे नाचैं बन के मोरवा ठीक ठीक सखी
बड़ा लागै नीक सखी ना ।

थामि अँचरा कै किनारा
कइलैं अँखिया से इशारा,
सेन्हुरा लेके चुपके मँगिया दिहलैं टीक सखी
बड़ा लागै नीक सखी ना ।

मुँहवाँ चूमि-चूमि आली
पंकिल ओठवा पै बनमा्ली,
रखलैं अधर नन्दनन्दन सटीक सखी
बड़ा लागै नीक सखी ना ।

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10 comments

  1. दोनों ही कजरी झुमा गयी…कहीं से आडियो भी उपलब्ध करा यें तो मजा आ जाये…अपनी ही आवाज में।

  2. बढियां है हिमांशु भाई कम से कम इन कजरी गीतों से ही कोमल अहसास जाग जायं -नहीं तो सूखे ने तो मानो जान ही सुखा दी है

  3. कजरी की अगली कड़ी अच्छी लगी । साधु साधु ।

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