General Articles, Hindi Blogging, Ramyantar

हिन्दी ब्लॉग लेखन: टिप्पणीकारी: Sow the wind and reap the whirlwind

पिछली प्रविष्टि का शेष . “Sow the wind and reap the whirlwind” की प्रवृत्ति ने भी टिप्पणीकारी का चरित्र बहुत अधिक प्रभावित किया है । यह अनुभव भी बहुत कुछ प्रेरित करता रहा टिप्पणीकारी पर लिखने के लिये । मन…

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हिन्दी ब्लॉग लेखन: टिप्पणीकारी: जो मन ने कहा

टिप्पणीकारी को लेकर सदैव मन में कुछ न कुछ चलता रहता है। नियमिततः कुछ चिट्ठों का अध्ययन और उन चिट्ठों पर और खुद के चिट्ठे पर आयी टिप्पणियों का अवलोकन बार बार विवश करता रहा है कुछ व्यक्त करने के…

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रावण की भुजाओं के अस्त्र-शस्त्र एवं अन्य प्रतीक

आत्म रामायण के प्रतीकों की चर्चा करती हुई कल की प्रविष्टि का शेष आज लिख रहा हूँ । रावण की भुजाओं के अस्त्र-शस्त्र एवं काटने वाले बाण अस्त्र-शस्त्र काटने वाले बाण कुबुद्धिक मान पाप-बाण विश्चासघात चक्र हिंसा-खड्ग परद्रोह नेजा(बघ नख)…

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रावण के दस सिर और उन्हें काटने वाले बाण

मेरे एक मित्र यूँ तो चिट्ठाकारी नहीं करते, पर चिट्ठा-चर्चा और अन्य चिट्ठे पढ़ते जरूर हैं। यद्यपि इन्हें पढ़ने का उनका शौक मेरे ही कम्प्यूटर से पूरा हो पाता है, क्योंकि मेरे कस्बे में दूसरी जगहों पर इण्टरनेट केवल व्यावसायिक…

Poetry, Ramyantar

पिता मैं बहुत थोड़ा हूँ तुम्हारा

माँ केन्द्रित दूसरी कविता पोस्ट कर रहा हूँ। इस कविता का शीर्षक और इसके कवि का नाम मुझे नहीं मालूम, यदि आप जानते हों तो कृपया यहाँ टिप्पणी में वह नाम जरूर लिखें। पिता मैं बहुत थोड़ा हूँ तुम्हारा और…

Poetry, Ramyantar

माँ: नौ कवितायें

कुछ दिनों पहले चिट्ठा चर्चा में कविता जी ने ’माँ’ पर लिखी कविताओं की भावपूर्ण चर्चा की थी। तब से ही मन में इसी प्रकार की कुछ कविताओं की पंक्तियाँ बार-बार स्मरण में आ रहीं थीं। बहुत याद करने पर,…

Hindi Ghazal, Ramyantar, Songs and Ghazals

सम्हलो कि चूक पहली इस बार हो न जाये(गज़ल)

सम्हलो कि चूक पहली इस बार हो न जाये सब जीत ही तुम्हारी कहीं हार हो न जाये। हर पग सम्हल के रखना बाहर हवा विषैली नाजुक है बुद्धि तेरी बीमार हो न जाये। अनुकूल कौन-सा तुम मौका तलाशते हो…

Ramyantar

उसने चिट्टी इस प्रकार लिखी

आज कुछ और नहीं, मेरे मित्र का मेरी ऑर्कुट स्क्रैपबुक में लिखा स्क्रैप पोस्ट कर रहा हूँ । एक गांव में एक स्त्री थी । उसके पती आई आई टी मे कार्यरत थे । वह अपने पति को पत्र लिखना…

Contemplation, Essays, Ramyantar, चिंतन

मैं क्या हूँ? जानना इतना आसान भी तो नहीं

अपनी कस्बाई संस्कृति में हर शाम बिजली न आने तक छत पर लेटता हूँ। अपने इस लघु जीवन की एकरस-चर्या में आकाश देख ही नहीं पाता शायद अवकाश लेकर। और फिर आकाश को भी खिड़कियों से क्या देखना। तो शाम…

Hindi Ghazal, Ramyantar, Songs and Ghazals

जी दुखी अपना यह खंडहर देखकर

कोई भाया न घर तेरा घर देखकर जी दुखी अपना यह खंडहर देखकर। आ गिरा हूँ तुम्हारी सुखद गोद में चिलचिलाती हुई दोपहर देखकर। साँस में घुस के तुमने पुकारा हमेंहम तो ठिठके थे लम्बा सफर देखकर। अब किसी द्वार…