Ramyantar

उषा की ऋचाएँ

उदात्त नारी की तरह उषा प्रत्येक वस्तु को सहलाती सँवारती आती है। सकल चराचर जीवन को जगाती हुई, वह प्रत्येक पदचारी प्राणी को गतिमान करती है, और पक्षियों में उड़ान भरती है। आदि दिन को वह जानती है और अन्धकार…

Poetry, Ramyantar

महसूस करता हूँ, सब तो कविता है

 (Photo credit: soul-nectar) मैं रोज सबेरे जगता हूँ दिन के उजाले की आहट और तुम्हारी मुस्कराहट साफ़ महसूस करता हूँ। चाय की प्याली से उठती स्नेह की भाप चेहरे पर छा जाती है। फ़िर नहाकर देंह ही नहींमन भी साफ़…

Blog & Blogger, Hindi Blogging, Ramyantar

चिट्ठाकार-चर्चा, चिट्ठा-चर्चा और चिट्ठा-चर्चा

आपने पढ़ी होगी। अगर नहीं पढ़ी, तो यह रही अरविन्द जी की चिट्ठाकार-चर्चा, इस चर्चा के एक कूट शब्द को अनावृत करती रचना जी की यह टिप्पणी और इस टिप्पणी पर थोड़ी और खुलती यह चिट्ठा-चर्चा। नहीं मालूम, अरविन्द जी…

Ramyantar

दीपावली बीत गयी तो क्या

दीपावली की बधाई देते हुए अपने एक फौजी मित्र को शुभकामना-पत्र भेंजा था । आज वह मुझ तक वापस आ गया । पता नहीं मिला, या पहुंच न सका, पता नहीं । मैंने सोचा उसे यहाँ पोस्ट करुँ । भाव…

Poetry, Ramyantar

दिया राहु लिख चन्द्रमा लिखते-लिखते

 Flowers (Photo credit: soul-nectar) कविता: प्रेम नारायण ’पंकिल’ जो बोया वही तो फसल काटनी है दिया लिख अमा पूर्णिमा लिखते-लिखते। पथिक पूर्व का था चला किन्तु पश्चिम दिया राहु लिख चन्द्रमा लिखते-लिखते। रहा रात का ही घटाटोप बाँधेन बाहर निकलकर…

Article, Blog & Blogger, Hindi Blogging, Ramyantar, आलेख

रीमा जी की ’बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम’ और अरविन्द जी की टिप्पणी: कुछ मैं भी कहूँ

सबसे पहले स्पष्ट करूँ कि इस आलेख की प्रेरणा और प्रोत्साहन अरविन्द जी की टिप्पणी है, जो उन्होंने रीमा जी की प्रविष्टि पर की है। रीमा जी ने ’बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम’ मुहावरे को वृद्ध-परिहास का मुहावरा मान लिया है।…

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

कविता और कविता का बहुत कुछ

१) कविता उमड़ आयी अन्तर्मन में जैसे उतर आता है मां के स्तनों में दूध। २)  कविता का छन्दसध गया वैसे हीजैसे स्काउट की ताली मेंमन का उत्साह। ३)  कविता का शब्दसज गया बहुविधिजैसे बनने को मालासजते हैं फूल। ४)कविता…

Article, General Articles, Ramyantar, आलेख

जनता तुम्हारा जूता देख रही है

मेरे जिले की एकमात्र संसदीय लोकसभा सीट ’चन्दौली’ के लिये नामांकन कार्यालय में एक प्रत्याशी, नाम तो बड़ा सुशोभन है ’भागवत’ किन्तु करनी बड़ी भोथरी है, गधे पर बैठकर और जूते की माला पहनकर नामांकन करने गया। लोकतंत्र का इतना…

Poetry, Ramyantar

हंसी का व्यवहार

Hibiscus (Photo : soul-nectar) आंसू खूब बहें, बहते जांय हंसी नहीं आती, पर हंसी खूब आये तो आंखें भर-भर जाती हैं आंसू आ जाते हैं आंखों में। कौन-सा संकेत है यह प्रकृति का? वस्तुतः कितना विलक्षण है हंसी का यह…