Ramyantar, नाटक

नल-दमयंती-2

पहली कड़ी से आगे… तृतीय दृश्य   (रनिवास का दृश्य। नल चकित होकर रनिवास देखता है। दमयंती का प्रवेश।) दमयंती: हे वीराग्रणी! आप देखने में परम मनोहर और निर्दोष जान पड़ते हैं। पहले अपना परिचय तो बतायें! आप यहाँ किस उद्देश्य…

Ramyantar, नाटक

नल-दमयंती

अरविन्द जी ने शिल्पा मेहता जी के एक विशिष्ट आग्रह को पूर्ण करते हुए कुछ दिनों पूर्व नल-दमयंती आख्यान सरलतः अपने ब्लॉग पर प्रकाशित किया। नल और दमयंती की प्रणय-परिणय कथा मुझे भी आकर्षित किए हुए थी, और इसे नाट्य-रुप…

Ramyantar

अविरल गति: वीना की कविता

Chandraparbha River flow: Naugarh-Chandauli एक नदी अविरल गति से बहती जा रही थी इठलाती हुई, बलखाती हुई कुछ कहती जा रही थी सबको मोह रही थी कल-कल पायल की झनकार से खुश थी बहुत, न था उसे कोई कष्ट इस…

Ramyantar, नाटक

सावित्री-6

सावित्री-1, सावित्री-2, सावित्री-3, सावित्री-4 एवं सावित्री-5 से आगे…… पंचम दृश्य (जंगल का दृश्य। सत्यवान के हाथ में कुल्हाड़ी, कन्धे पर गमछा, सावित्री के हाथ में टोकरी और पानी का बर्तन) चित्र:अर्द्धेन्दु बनर्जी;स्रोत:Kamat’s Potpourri सत्यवान: सुखदायिनी! टोकरियों में पहले फल भर लिया…

Ramyantar, नाटक

सावित्री-5

सावित्री-1, सावित्री-2, सावित्री-3 एवं सावित्री-4 से आगे…… चतुर्थ दृश्य (महाराजा द्युमत्सेन की पवित्र स्थलीय आश्रम जैसी व्यवस्था। सावित्री पति के साथ सुख पूर्वक निवास करती है। आभूषण उतार कर रख देती है और गैरिक वसना हो जाती है। पति सास-ससुर की सेवा कर…

Ramyantar

तुम नहीं हो, पर यह ’नहीं’ ’नास्ति’ नहीं है..

“वहाँ उपेक्षा कायरता है जहाँ उचित प्रतिकार क्रोध ले न प्रतिशोध तो न हो सीता का उद्धार।” Photo1:Daniel Berehulak;Source:The Atlantic इतिहास के व्योम विस्तार में अनगिन घटनायें उल्कापिण्ड की तरह गिरती उतरती विलीन होती रहती हैं और समय चक्र उसे…

Ramyantar, नाटक

सावित्री-4

सावित्री-1, सावित्री-2 एवं सावित्री-3 से आगे…… तृतीय दृश्य (महाराजा अश्वपति का राजदरबार। बन्दी विरद गान कर रहे हैं। आमोद-प्रमोद का हृदय हारी दृश्य। देवर्षि नारद का प्रवेश।) नारद: नारायण! नारायण! महाराजा: देवर्षि के चरणों में राजदरबार सहित अश्वपति का प्रणाम…

Ramyantar, भोजपुरी

सुरसरि तीरवाँ खड़े हैं दुनो भईया रामा

केवट प्रसंग रामायण के अत्यन्त सुन्दर प्रसंगों में से एक है, खूब लुभाता है मुझे। करुण प्रसंगों के अतिरेक में यह प्रसंग बरबस ही स्नेहनहास का अद्भुत स्वरूप लेकर खड़ा होता है। विचारता हूँ राम की परिस्थिति को, कैकयी की…

Ramyantar, नाटक

सावित्री-3

सावित्री-1 एवं सावित्री-2 से आगे…… सावित्री: गुरुदेव! यहीं सरिता तट पर रुक जायें। यहाँ जो जहाँ है सत्य को समर्पित है। सब चिर परिचित सा लग रहा है। ये फूल, यह लहराता वृक्ष, ये सूखी वन की लकड़ियाँ, यह नदी…