Ramyantar, नाटक

सावित्री-2

  सावित्री-1 से आगे…. द्वितीय दृश्य  (वन प्रान्तर का दृश्य। पक्षियों का मधुर संगीत गुंजायमान है। दूर मन्दिरों की घंटियाँ एवं शंख-ध्वनि सुनायी पड़ रही है।) सावित्री: (भ्रमण करते हुए) देखो प्रातःकालीन बेला समुपस्थित है। प्रभात का ग्वाल-बाल उदयाचल से…

Ramyantar, नाटक

सावित्री

इस ब्लॉग की नाट्य प्रस्तुतियाँ करुणावतार बुद्ध (1,2,3,4,5,6,7,8,9,10) एवं सत्य हरिश्चन्द्र (1,2,3,4,5,6,7,8,9) उन प्रेरक चरित्रों के पुनः पुनः स्मरण का प्रयास हैं जिनसे मानवता सज्जित व गौरवान्वित होती है। ऐसे अन्याय चरित्र हमारे गौरवशाली अतीत की थाती हैं और हमें अपना वह…

Ramyantar

प्रणय-पीयूष-घट हूँ मैं

Sarracenia    © Karen Hall प्रणय-पीयूष-घट हूँ मैं। आँख भर तड़ित-नर्तन देखता मेघ-गर्जन कान भर सुनता हुआ  पी प्रभूत प्रसून-परिमल  ओस-सीकर चूमता निज अधर से   जलधि लहरों में लहरता  स्नेह-संबल अक्षय वट हूँ मैं। देखता खिलखिल कुसुम तरु सुरभि हाथों…

Ramyantar, कहानी, सौन्दर्य-लहरी

कथा प्रसंग: जब शंकर के हृदय से सौन्दर्य लहरी फूट पड़ी

आचार्य शंकर की दिग्विजय का एक मर्मस्पर्शी प्रसंग दृश्य प्रथम प्रत्यक्ष के लिए प्रमाण चाहते हो संन्यासी?” तांत्रिक अभिनव शास्त्री का क्रुद्ध स्वर शास्त्रार्थ सभा में गूँजा, तो उपस्थित पंडित वर्ग में छूट रही हल्की वार्ता की फुहारें भी शांत…

Ramyantar, नाटक

राजा हरिश्चन्द्र-9

पिछली प्रविष्टियों राजा हरिश्चन्द्र- एक, दो, तीन, चार, पाँच, छः, सात और आठ से आगे….. इस ब्लॉग पर करुणावतार बुद्ध नामक नाट्य-प्रविष्टियाँ मेरे प्रिय और प्रेरक चरित्रों के जीवन-कर्म आदि को आधार बनाकर लघु-नाटिकाएँ प्रस्तुत करने का प्रारंभिक प्रयास थीं…

Ramyantar, प्रसंगवश

ग्रीष्म-1: ग्रीष्म-गरिमा-2

ग्रीष्म श्रूंखला में ब्रजभाषा से निकली यह ’ग्रीष्म-गरिमा’ आपके सम्मुख है, कवि हैं अल्पज्ञात कवि ’सत्यनारायण’। पहली कड़ी के बाद आज दूसरी कड़ी – ग्रीष्म-गरिमा जबै अटकत आपस में बंस, द्रोह दावानल पटकत आय । खटकि चटकत करिवे निज ध्वंस,…

Ramyantar, प्रसंगवश

ग्रीष्म-1: ग्रीष्म-गरिमा-1

गर्मी की बरजोरी ने बहुतों का मन थोर कर दिया है, मेरा भी। वसंत का मगन मन अगन-तपन में सिहुर-सा गया है। कोकिल कूकने से ठहरी, भौरा गुंजरित होने से, फिर अपनी क्या मजाल कि इस बउराती लूह के सामने…

Ramyantar, नाटक

राजा हरिश्चन्द्र-8

पिछली प्रविष्टियों राजा हरिश्चन्द्र- एक, दो, तीन, चार, पाँच, छः और सात से आगे….. इस ब्लॉग पर करुणावतार बुद्ध नामक नाट्य-प्रविष्टियाँ मेरे प्रिय और प्रेरक चरित्रों के जीवन-कर्म आदि को आधार बनाकर लघु-नाटिकाएँ प्रस्तुत करने का प्रारंभिक प्रयास थीं ।…