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वाक् वैदग्ध्य, हास्य और चुनाव का महापर्व

आजकल चुनावों का महापर्व ठाठें मार रहा है। इस महापर्व के संवाद-राग में मैने वाक् वैदग्ध्य के प्रकार ढूंढे। माफी मुझे पहले ही मिल जानी चाहिये यदि यह सब कुछ केवल बुद्धि का अभ्यास लगे। बात यह भी थी कि…

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जो प्रश्न हैं अस्तित्वगत…

जो प्रश्न हैं अस्तित्वगत तूं खींच चिन्तन बीच मत बस जी उसे उस बीच चल उससे स्वयं को दे बदल। यदि प्रेम को है जानना तो खाक उसकी छानना उस प्रेम के भीतर उतर निज पूर्ण कायाकल्प कर। जो प्रश्न…

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पात-पात में हाथापायी बात-बात में झगड़ा

पात-पात में हाथापायी बात-बात में झगड़ा किस पत्थर पर पता नहीं मौसम ने एड़ी रगड़ा। गांव गिरे औंधे मुंह गलियां रोक न सकीं रुलाई ’माई-बाबू’ स्वर सुनने को तरस रही अंगनाई, अब अंधे के कंधे पर बैठता नहीं है लंगड़ा।…

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आत्मा की अमरता (एक अफ्रीकी मिथक कथा )

मृत्यु और आत्मा में दुश्मनी थी, मृत्यु ने कहा, “मैं… तुम्हें मार डालूंगी”। आत्मा ने उत्तर दिया, “मुझे… मारा नहीं जा सकता।” आत्मा और उसके साथी मौत के गांव गये । आत्मा ने पहले चमगादड़ को टोह लेने के लिये…

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ले प्रसाद जय बोल सत्यनारायण स्वामी की

बजी पांचवी शंख कथा वाचक द्रुतगामी की। ले प्रसाद जय बोल सत्यनारायण स्वामी की। फलश्रुति बोले जब मन हो चूरन हलवा बनवाओ बांट-बांट खाओ पंचामृत में प्रभु को नहलाओ, इससे गलती धुल जायेगी क्रोधी-कामी की। कलश नवग्रह गौरी गणपतिपर दक्षिणा…

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प्रार्थना मैं कर रहा हूं

प्रार्थना मैं कर रहा हूं गीत वह अव्यक्त-सा अनुभूतियों में घुल-मिले। हंसी के भीतर छुपा बेकल रुंआसापन और सम्पुट में अधर के बेबसी का क्षण, प्रार्थना मैं कर रहा हूं अश्रु जो ठहरा हुआ शुभ भाव ही के हित निकल…

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अंग्रेजी में हिन्दी का रचना संसार : शुरुआत भर कर रहा हूँ

हिन्दी साहित्य की अबाध धारा निरन्तर प्रवाहित हो रही है और उसकी श्री वृद्धि निरन्तर दृष्टिगत हो रही है। हिन्दी साहित्य के विविध आयामों में इतना सबकुछ जुड़ता और संचित होता चला जा रहा है कि हमारी राष्ट्रभाषा का कोश…

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प्रेम के अमूल्य कण

तुमने अपने हृदय में जो अनन्त वेदना समो ली है और उस वेदना को ही अपनी अमूल्य सम्पत्ति समझ उसे पोषित करते हो वस्तुतः उसी से प्राप्त प्रेम के अमूल्य कण                                          मेरे निर्वाह के साधन हैं। मैं एक मुक्त पक्षी…

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प्यार और मुक्त हृदय

वह तुम्हारा मुक्त हृदय था जिसने मुझे प्यार का विश्वास दिया, मैं तुम्हें प्यार करने लगा। मैं तुम्हें प्यार करता था अपनी समस्त जड़ता से ऊपर उठकर और इसलिये ही तुम मुक्त हृदय थे।

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बनारस की होली बनारस की बोली में

अब का पूछ्त हउआ हमसे कि होली का होला। कइसे तोंहके हाल बताई कवन तरीके से समझाई कइसन बखत रहल हऽ ऊ भी कवने भाषा में बतलाई, उछरत रहल बांस भर मनवां जमत रहल जब गोला। छैल चिकनियां छटकत रहलन…