सच्चा शरणम्
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प्यार और मुक्त हृदय

Love-Roseवह तुम्हारा
मुक्त हृदय था
जिसने मुझे प्यार का
विश्वास दिया,
मैं तुम्हें प्यार करने लगा।

मैं तुम्हें प्यार करता था
अपनी समस्त जड़ता से
ऊपर उठकर
और इसलिये ही
तुम मुक्त हृदय थे।

12 comments

  1. आश्चर्यजनक. बहुत सुन्दर. पहले अंडा या मुर्गी वाली पहेली बन गयी. आभार.

  2. गहराई में डूबी हुई सरल व लघु कविता..

  3. मैं तुम्हें प्यार करता था

    अपनी समस्त जड़ता से

    ऊपर उठकर

    बहुत खूब प्रेम की ऊंचाई को बताती है यह सुन्दर रचना

  4. सुन्‍दर र‍चना।
    बधाई स्‍वीकारें।
    होली की हार्दिक शुभकामनाऍं।

  5. bahut pyari rachna.

    मैं तुम्हें प्यार करता था

    अपनी समस्त जड़ता से

    ऊपर उठकर

    बहुत खूब प्रेम की ऊंचाई को बताती है यह सुन्दर रचना
    ranjna ji ki pamktian jyon ki tyon , bilkul sateek. himanshu ji poori chhap hai aapki kavitaon men gurudev ravindra nath tagore ki, ek lekh pyaar vishay par bhi likho , aapse asha kar sakta hun, bahut se blogger pyaar ko poori tarah samajhte hi nahin hain unki soch sirf filmi pyaar tak seemit hai.kuchh likho.

  6. बहुत ही सुंदर रचना , आप का धन्यवाद

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