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Poetry, Ramyantar, Verse

तो मर्द बखानूँ मैं

पिस-पिस कर भर्ता हुए समय के कोल्हू में तुम समायातीत बनो तो मर्द बखानूँ मैं। जाने कितने घर-घर के तुम व्यवहार बने कितने-कितने हाथों के तुम औजार बने रंगीन खिलौनों वाली दुनियादारी में तुम दर-दर चलते फिरते बाजार बने, बन…

Poetry, Ramyantar, Verse

भिखारी: नख-शिख वर्णन

कुछ दिनों पहले एक भिक्षुक ने दरवाजे पर आवाज दी। निराला का कवि मन स्मृत हो उठा। वैसी करुणा का उद्वेग तो हुआ, पर व्यवस्था के प्रति आक्रोश ने शब्द का चयन बदल दिया। क्षमा के साथ। कुछ कहेंगे इस…

Poetic Adaptation, Poetry, Ramyantar, Verse

समय पखेरू है भागते समय को पकड़ो

अमेरिकी दार्शनिक कवि इमरसन (Ralph Waldo Emerson) का एक प्रसंग पढ़ रहा था । समय की अर्थवत्ता को ध्वनित करता यह प्रसंग बहुत दूर तक प्रासंगिक लगा। कविता का संस्कार है। अपने छोटे से भतीजे को ग्राह्य बनाने हेतु उस…

Love Poems, Poetry, Ramyantar, Verse

तुम बिन बोले (कविता)

बहुत पहले जब अपने को तलाश रहा था एक कविता लिखी थी- कुछ रूमानी- कसक और घबराहट की कविता। शब्द जुटाने आते थे और उस जुटान को मैं कविता कह दिया करता था या कहूं दोस्त कह दिया करते थे।…