सच्चा शरणम्
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नहीं बोलते प्राणधन यदि हमारे (गीतांजलि का भावानुवाद )

If thou speakest not I will fill my
heart with thy silence and endure
it. I will keep still and wait like
the night with starry vigil and its
head bent low with patience .
The morning will surely come,the darkness
will vanish, and thy voice pour-down in golden
streams breaking through the sky.
Then thy words will take wing in songs
from every one of my birds’ nests,
and thy melodies will break forth
in flowers in all my forest groves.(R.N. Tagore-Geetanjali)
नहीं बोलते प्राणधन यदि हमारे .
तुम्हारा यही मौन उर बीच भरकर रहूँगा सहनशीलता शान्ति धारे ..
परम मौन मैं शान्ति धारण करूंगा
प्रतीक्षा करूंगा,प्रतीक्षा करूंगा
उसी यामिनी सी स्थिरा शांत कोने,विनत सिर खड़ी जो सजाये सितारे –
नहीं बोलते प्राणधन यदि हमारे ..
करेगा चरण न्यास प्रातः असंशय
न होगी प्रकट दृश्य क्षणिका तिमिरमय
तुम्हारी गिरा हेम स्रोतस्विनी सी बहेगी, गगन के शिथिल कर किनारे-
नहीं बोलते प्राणधन यदि हमारे ..
सपंखी विहंगम सदृश गीत बनकर
उडेंगे मेरे नीद-चय से तेरे स्वर
तुम्हारे मधुर स्वर मेरे कुञ्ज वन के,सुमन प्रति सुमन में रहेंगे पधारे-
नहीं बोलते प्राणधन यदि हमारे .. (‘पंकिल’-मेरे बाबूजी)

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