Monthly Archives

December 2008

Article, Contemplation, General Articles, Psychology, आलेख, चिंतन

आओ करें, कुछ दीवानगी की बातें

“न समझने की ये बातें हैं, न समझाने की जिंदगी उचटी हुई नींद है दीवाने की। “ पढ़ कर कई बार सोचता रहा- “जिंदगी उचटी हुई नींद है दीवाने की। ” जिंदगी समझ में नहीं आयी, आती भी कैसे? जिंदगी…

Poetry, Ramyantar, Songs and Ghazals

माँ तुम गंगाजल होती हो

अभी-अभी पूजा उपाध्याय जी के ब्लॉग से लौट रहा हूँ। एक कविता पढ़ी- माँ के लिए लिखी गयी। मन सम्मोहित हो गया। पूजा जी की कविता से जेहन में एक कविता की स्मृति तैर गयी। छुटपन में बाबूजी ने पढ़ने…

Poetic Adaptation, Poetry, Ramyantar

जहाँ रुका है मन आँखें भी रुक रह जातीं

आँखें अपरिसीम हैं, संसृति का आधार है बिना दृष्टि का सृष्टि निवासी निराधार। ऑंखें बोती हैं देह-भूमि पर प्रेम-बीज इन आंखों पर ही जाता है हर रसिक रीझ। मन का हर उद्दाम भाव आँखें कह जातीं जहाँ रुका है मन…

Article on Authors, Literary Classics, Ramyantar

कवि, प्रेमी और पक्षी-विशेषज्ञ

आज सुबह एक कविता पढ़ी – ‘Poet, Lover, Birdwatcher‘। कविता ने बाँध लिया क्योंकि यह कमोबेश उन मान्यताओं या राहों की रूपरेखा तय करती है जिनसे कवि का कर्तव्य या उसका कवित्व उल्लेखनीय बनता है। कवित्व, प्रेम-कर्तव्य और पक्षी-अवलोकन को…

Love Poems, Poetry, Ramyantar

मैं हुआ स्वप्न का दास

Water dream (Photo credit: @Doug88888) मैं हुआ स्वप्न का दास मुझे सपने दिखला दो प्यारे। बस सपनों की है आस मुझे सपने दिखला दो प्यारे॥ तुमसे मिलन स्वप्न ही था, था स्वप्न तुम्हारा आलिंगन जब हृदय कंपा था देख तुम्हें,…

Article, Contemplation, आलेख, चिंतन

मेरा अकेलापन और रचना का सत्य-सूत्र

मैं लिखने बैठता हूँ, यही सोचकर की मैं एक परम्परा का वाहक होकर लिख रहा हूँ। वह परम्परा कृत्रिमता से दूर सर्जना का विशाल क्षितिज रचने की परम्परा है जिसमें लेखक अपनी अनुभूतियाँ, अपने मनोभाव बेझिझक, बिना किसी श्रम और…

Blog & Blogger, Hindi Blogging, Ramyantar

किसी हिन्दी चिट्ठे के सौ प्रशंसक होने का मतलब (हिन्दी ब्लॉग टिप्स का सन्दर्भ)

आज की लेखनी (या उसे चिट्ठाकारी कहिये) का गुण है कि वह पठनीय हो कि जटिलताओं के अवकाश को भरने के लिए और दुर्वह स्थितियों से पलायन के लिए वह हमारी सहायता करे। पठनीयता के साथ अपने आप एक विशेषण…

Poetry, Ramyantar, Songs and Ghazals

मेरे साथी सलोने!

कहाँ भूल गया जीवन का राग, मेरे साथी सलोने । क्यों रूठ गया अपना यह भाग, मेरे साथी सलोने। कैसे जतन से ये जीवन सजाया पड़ गयी उस पर भी बैरन की छाया मेरा सूख गया लहराता फाग, मेरे साथी…

Contemplation, Hindi Blogging, Ramyantar, चिंतन

मस्ती की लुकाठी लेकर चल रहा हूँ

A leaf  (Photo credit: soul-nectar) मैं यह सोचता हूँ बार-बार की क्यों मैं किसी जीवन-दर्शन की बैसाखी लेकर रोज घटते जाते अपने समय को शाश्वत बनाना चाहता हूँ? क्यों, यदि सब कुछ क्षणभंगुर है तो उसे अपनी मुट्ठियों में भर…

Poetry, Ramyantar

दर्द सहता रहा उसे ..

दर्द सहता रहा उसे, सहता है अब तलक। दर्द ने अपनी हस्ती भर उसे चाहा उसकी शिराओं, मांसपेशियों से होते- होते उसके मस्तिष्क, उसके हृदय तक अपनी पैठ बना ली, तब उसने इस दर्द को अपना नाम ही दे दिया।…