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January 2009

Article, Literary Classics, Stories, आलेख

प्रेम का स्वाद तीखा होता है

Two Stories on Love

प्रेम के अनेकानेक चित्र साहित्य में बहुविधि चित्रित हैं। इन चित्रों में सर्वाधिक उल्लेख्य प्रेम की असफलता के चित्र हैं। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से प्रेम की असफलता एवं इस असफलता से उत्पन क्रिया-प्रतिक्रया पर काफी विचार किया जा सकता है, पर…

Poetry, Ramyantar

वह डोर ही नहीं बुन पा रहा हूँ

मैं जिधर भी चलूँ मैं जानता हूँ कि राह सारी तुम्हारी ही है, पर यह मेरा अकिंचन भाव ही है कि मैं नहीं चुन पा रहा हूँ अपनी राह। मैंने बार-बार राह की टोह ली पर चला रंच भर भी…

Poetry, Ramyantar

एक दिन ब्रह्मा मिल जाते…

एक दिन ब्रह्मा मिल जाते तो उनसे पूछता कुछ प्रश्न और अपनी जिज्ञासा शांत करता कि क्यों नहीं पहुंचती उन तक किसी की चीख? उनसे पूछता कि जिसका तना मजेदार, खूब रसभरा है फलदार क्यों नहीं हो गयी वह ईख…

Article, Contemplation, Essays, आलेख, चिंतन

अति सूधो सनेह को मारग है

कल मेरे पास के घर की वृद्धा माँ को वृद्धाश्रम (Old-age Home) भेंज दिया गया। याद आ गया कुछ माह पहले का अपना वृद्धाश्रम-भ्रमण। गया था यूँ ही टहलते-टहलते अपने जोधपुर प्रवास के दौरान। सोचा था देवालय जैसा होगा। आँखें…

Poetry, Ramyantar

एक स्त्री के प्रति

स्वीकार कर लिया काँटों के पथ को पहचाना फ़िर भी जकड़ लिया बहुरूपी झूठे सच को कुछ बतलाओ, न रखो अधर में हे स्नेह बिन्दु! क्यों करते हो समझौता? जब पूछ रहा होता हूँ, कह देते हो ‘जो हुआ सही…

Poetry, Ramyantar

मधु की तरह घुलता जा रहा हूँ मैं

नये वर्ष के आगमन पर बहुत कुछ संजोया है मन में। सम्भव है नए साज बनें हृदय के अनगिन स्नेहिल तार जुडें मन का रंजन हो उल्लसित हर अकिंचन हो स्वप्न अवसित धरा पर मधुरिम यथार्थ का स्यंदन हो। विचारता…