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February 2009

Article | आलेख, Essays, Politics

उस समाज पर गाज गिरे जिसके तुम नायक

एक पार्टी का झंडा लिये एक भीड़ मैदान से गुजरी है। अपनी पड़ोस का कुम्हार उसी में उचक रहा है। बी0ए0 प्रथम वर्ष की छात्र पंजिका में रजिस्टर्ड बच्चे उत्सुकता से हुजूम देख रहे हैं। पास ही लकड़ी की दुकान…

Love Poems, Poetry, Ramyantar, Songs and Ghazals

ओ प्रतिमा अनजानी

ओ प्रतिमा अनजानी, दिल की सतत कहानी कहता हूँ निज बात सुहानी, सुन लो ना। डूबा रहता था केवल जीवन की बोध कथाओं में अब खोया हूँ मैं रूप-सरस की अनगिन विरह-व्यथाओं में सत्य अकल्पित-मधुरित-सुरभित, अन्तरतम में हर पल गुंजित…