बजी पांचवी शंखSatyanarayan Katha
कथा वाचक द्रुतगामी की।
ले प्रसाद जय बोल
सत्यनारायण स्वामी की।

फलश्रुति बोले जब मन हो
चूरन हलवा बनवाओ
बांट-बांट खाओ पंचामृत
में प्रभु को नहलाओ,
इससे गलती धुल जायेगी
क्रोधी-कामी की।

कलश नवग्रह गौरी गणपति
पर दक्षिणा चढ़ाओ।
ठाकुर जी को स्वर्ण अन्न
गो का संकल्प कराओ,
सही फलेगी खूब कमाई
तभी हरामी की।

पोथी पर पीताम्बर रख दो
भोजन दिव्य जिमाओ
हर पूर्णिमा-अमावस्या को
यह जलसा करवाओ,
फिर तो चर्चा कभीं न होगी
तेरी खामी की।

ब्राह्मण दीन लकड़हारे की
कह-कह कथा पुरानी
पंडित जी चूकते नहीं
चमकाने में यजमानी,
फोकट में खोली है दुकान
चद्दर रमनामी की।