सच्चा शरणम्
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प्रेम के अमूल्य कण

तुमने अपने हृदय में love and pit
जो अनन्त वेदना
समो ली है

और उस वेदना को ही
अपनी अमूल्य सम्पत्ति समझ
उसे पोषित करते हो
वस्तुतः
उसी से प्राप्त
प्रेम के अमूल्य कण                                         
मेरे निर्वाह के साधन हैं।

मैं एक मुक्त पक्षी हूं
और वेदना-निःसृत
यही प्रेम के कण चुगता हूं।

photo : www.indiana.edu

12 comments

  1. मैं एक मुक्त पक्षी हूं
    और वेदना-निःसृत
    यही प्रेम के कण चुगता हूं ।

    -बहुत उम्दा!!

  2. Very well done.. You have touched my mind, heart, and soul deeply, with just a few choice words.. If only to find this pain, this particle …

  3. प्रेम के अमूल्य कण
    मेरे निर्वाह के साधन हैं ।

    जिसके पास प्रेम के कण है उसको फिर क्या चाहिए बहुत सुन्दर लगी आपकी यह रचना

  4. मैं एक मुक्त पक्षी हूं

    और वेदना-निःसृत

    यही प्रेम के कण चुगता हूं ।

    ” very touching expressions”

    regards

  5. निशब्द हूँ मैं । बहुत ही बेहतरीन रचना । बधाई

  6. सच में, मुक्त जीव ही प्रेम की सोचता है। सुन्दर पोस्ट।

  7. अति सुंदर भाव लिये है आप की यह कविता.
    धन्यवाद

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