सच्चा शरणम्
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सही कहा तुमने…..

वर्ष अतीत होते रहे
पर धीरज न चुका
और न ही बुझा
तुम्हारा स्नेह युक्त मंगल प्रदीप,

महसूस करता हूँ-
तुम समय का सीना चीर कर
यौवन के रंगीले चित्र निर्मित करोगे,
एक कहानी लिखोगे, जिसमें होगा
स्नेह-स्वप्न-जीवन का इतिवृत्त,
और प्रतीक्षा में डबडबायी मेरी आँखें
पोंछ दोगे अपने मधु अधरों से ।

सही कहा तुमने
अदृश्य होते हैं हाँथ अनुग्रह के ।

18 comments

  1. kavya ke is abhinav swaroop ko dekh kar aaj din ki shuruaat kar rahaa hoon

    arthat shree ganesh bahut hi achha kar raha hoon..

    badhaai !

  2. बहुत सुंदर अभिव्‍यक्ति है .. बधाई स्‍वीकारें।

  3. बहुत सुंदर अभिव्‍यक्ति है .. हमारी भी बधाई स्‍वीकारें।

  4. बहुत सुंदर और कोमल अभिव्यक्ति.

    रामराम.

  5. भाई जादू है , बहुत सुंदर .
    धन्यवाद

  6. अदृश्य होते हैं हांथ अनुग्रह के इसीलिये तो टिप्पणी अद्रुश्य होकर कर्ते है हम ।

  7. सचमुच अदृश्य ही हैं हाथ अनुग्रह के ..!!!!

  8. सचमुच अदृश्य ही हैं हाथ अनुग्रह के ..!!!!

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