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July 2009

Blog & Blogger, Hindi Blogging, Ramyantar

क्या ब्लॉग साहित्य है ? – मेरी हाजिरी

बिजली आ गयी । हफ्ते भर बाद । ’बूड़े थे पर ऊबरे’ । बिजली की अनुपस्थिति कुछ आत्मबोध करा देती है । रमणियों की तरह इसकी एक झलक पाने की उत्कंठा रहने लगी है मन में । आज ही, अभी…

Ramyantar

मैं कैसे प्रेमाभिव्यक्ति की राह चलूँ .

तुम आयेविगत रात्रि के स्वप्नों में श्वांसों की मर्यादा के बंधन टूट गयेअन्तर में चांदनी उतर आयीजल उठी अवगुण्ठन में दीपक की लौविरह की निःश्वांस उच्छ्वास में बदल गयीप्रेम की पलकों की कोरों से झांक उठा सावनऔर तन के इन्द्रधनुषी…

Ramyantar, वृक्ष-दोहद

शुभे! मृदु-हास्य से चम्पक खिला दो (वृक्ष-दोहद के बहाने वृक्ष-पुष्प चर्चा)

यह देखिये कि बूँदे बरसने लगीं हैं, सूरज की चातुरी मुंह छुपा रही है और ग्रीष्म ने हिला दिये हैं अपने हाँथ और इधर मैं हूँ कि ग्रीष्म के कनकवर्णी चम्पक को ही विस्मृत किये बैठा हूँ। यह कैसे संभव…

Ramyantar

दोनों हाँथ जोड़कर…

मैं अपनी कवितायेंतुम्हें अर्पित करता हूँजानता हूँकि इनमें खुशियाँ हैंऔर प्रेरणाएँ भीजो यूँ तो सहम जाती हैंघृणा और ईर्ष्या के चक्रव्यूह सेपर, नियति इनमें भी भर देती हैनित्य का संगीत । यह कवितायें तुम्हारे लियेइसलियेकि यह कर्म और कारण की…

Ramyantar, Stories

प्रेम पंथ ऐसो कठिन …

प्रेम की अबूझ माधुरी निरन्तर प्रत्येक के अन्तस में बजती रहती है । अनेकों को विस्मित करती है, मुग्ध करती है और जाने अनजाने जीवन की उन ऊँचाइयों पर ले जाती है जिनसे जीवन अपनी अक्षुण्णता में विरलतम हो जाता…

Ramyantar

तू सदा ही बंधनों में व्यक्त है, अभिव्यक्त है

व्यथित मत होकि तू किसी के बंधनों में है, अगर तू है हवातू सुगंधित है सुमन के सम्पुटों में बंद होकरया अगर तू द्रव्य है निर्गंध कोईसुगंधिका-सा बंद है मृग-नाभि मेंया कवित है मुक्तछंदी तू अगरमुक्त है आनन्द तेरा सरस…

Ramyantar, वृक्ष-दोहद

रूपसी गले मिलो! कि कुरबक फूल उठे (वृक्ष-दोहद के बहाने वृक्ष-पुष्प चर्चा)

यूँ तो अनगिनत पुष्प-वृक्षों को मैंने जाना पहचाना नहीं, परन्तु वृक्ष-दोहद के सन्दर्भ में ’कुरबक’ का नाम सुनकर मन में इस पुष्प के प्रति सहज ही उत्कंठा हो गयी। मैंने इसे पहचानने का प्रयास किया। प्रथमतः जैसा कुछ ग्रंथों में…

Ramyantar, वृक्ष-दोहद

फूलो अमलतास ! सुन्दरियाँ थिरक उठी हैं (वृक्ष-दोहद के बहाने वृक्ष-पुष्प चर्चा)

स्वर्ण-पुष्प वृक्ष की याद क्यों न आये इस गर्मी में। कौन है ऐसा सिवाय इसके जो दुपहरी से उसकी कान्ति चुराकर दुपहर से भी अधिक तीव्रता से चमक उठे और सारा जीवन सारांश अभिव्यक्त करे। वह कौन-सी जीवनी शक्ति है…