Category

Article

Article, Blog & Blogger, Hindi Blogging, Ramyantar, आलेख

रीमा जी की ’बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम’ और अरविन्द जी की टिप्पणी: कुछ मैं भी कहूँ

सबसे पहले स्पष्ट करूँ कि इस आलेख की प्रेरणा और प्रोत्साहन अरविन्द जी की टिप्पणी है, जो उन्होंने रीमा जी की प्रविष्टि पर की है। रीमा जी ने ’बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम’ मुहावरे को वृद्ध-परिहास का मुहावरा मान लिया है।…

Article, General Articles, Ramyantar, आलेख

जनता तुम्हारा जूता देख रही है

मेरे जिले की एकमात्र संसदीय लोकसभा सीट ’चन्दौली’ के लिये नामांकन कार्यालय में एक प्रत्याशी, नाम तो बड़ा सुशोभन है ’भागवत’ किन्तु करनी बड़ी भोथरी है, गधे पर बैठकर और जूते की माला पहनकर नामांकन करने गया। लोकतंत्र का इतना…

Article, General Articles, Ramyantar, आलेख

वाक् वैदग्ध्य, हास्य और चुनाव का महापर्व

आजकल चुनावों का महापर्व ठाठें मार रहा है। इस महापर्व के संवाद-राग में मैने वाक् वैदग्ध्य के प्रकार ढूंढे। माफी मुझे पहले ही मिल जानी चाहिये यदि यह सब कुछ केवल बुद्धि का अभ्यास लगे। बात यह भी थी कि…

Article, Article on Authors, Ramyantar, आलेख

बनारस के प्रकाशन पुरुष: कृष्णचन्द्र बेरी

बनारस के प्रकाशन-संस्थानों में ‘हिन्दी प्रचारक संस्थान‘ का एक विशेष महत्व है। महत्व मेरी दृष्टि में इसलिये है कि इस संस्थान ने मेरी पठन-रुचि को तुष्ट करने में बड़ी भूमिका निभायी है। मेरे जैसे सामान्य आर्थिक पृष्ठ्भूमि के अध्येता और…

Article, Contemplation, Ramyantar, Stories, आलेख, चिंतन

सबका पेट भरे

एक महात्मा हैं, उनके पास जाता रहता हूँ। महात्मा से मेरा मतलब उस गैरिकवस्त्र-धारी महात्मा से नहीं, जिनके भ्रम में इस पूरी दुनियाँ का निश्छल मन छला जाता है। महात्मा से मेरा अर्थ महनीय आत्मा से है। बात-बात में उन्होंने…

Article, Article on Authors, Literary Classics, Ramyantar, आलेख

कहानी कैसे बनी (कर्तार सिंह दुग्गल के जन्म दिवस पर)

पिताजी की संग्रहित की हुई अनेकों किताबों में एक है ‘कहानी कैसे बनी’। उसे महीनों पहले पढ़ना शुरु किया था। कुल आठ कहानियों की यह किताब मुझे अविश्वसनीय रचनाधर्मिता का उदाहरण लगी। मैंने इसे पूरा का पूरा पढ़ तो लिया…

Article, General Articles, Ramyantar, आलेख

ज्ञान जीवन के लिये हो

Morning (Photo credit: soul-nectar) मेरे एक मित्र सामान्य ज्ञान के धुरंधर पंडित हैं। वे विविध प्रकार की सूचनायें एकत्र करने के लिये पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं आदि को पढ़ते रहते हैं । वे रेडियो तथा टी0वी0 आदि द्वारा अपनी जानकारी का भण्डार…

Article, Contemplation, Ramyantar, आलेख, चिंतन

चौथी शरण की खोज

’बच्चन’ का एक प्रश्न-चिह्न मस्तिष्क में कौंध रहा है, उत्तर की खोज है – “भूत केवल जल्पना है औ’ भविष्यत कल्पना है वर्तमान लकीर भ्रम की और क्या चौथी शरण भी ? स्वप्न भी छल जागरण भी।“ वह चौथी शरण…

Article, Article on Authors, Ramyantar, आलेख

पत्रगीति और निराला की कविता शिवाजी का पत्र

छायावादी कवियों की नवीन चेतना के प्रसार के परिणामस्वरूप छायावादी रूढ़ि विद्रोही नवीन युग बोध ने इन्हें समस्त रूढ़ि बन्धनों का तिरस्कार कर अपने भावों के संप्रेषण के लिये तथा विचारों के अनुकूल भिन्न-भिन्न प्रकार की नयी काव्य-विधाओं की रचना…

Article, General Articles, Ramyantar, आलेख

मुझसे ये सौदा हो नहीं सकता

हम घोर आश्चर्य और निराशा के घटाटोप में घिर गये हैं। अपने पूर्वजों पर दृष्टि डालते हैं तो देखते हैं कि बहुत से लोग आर्थिक दृष्टिकोण से पिछड़े वर्ग के सदस्य न थे। किंतु उन्होने अपनी दौलत को बजाय किसी…