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Poetry

Poetic Adaptation, Poetry, Ramyantar

जहाँ रुका है मन आँखें भी रुक रह जातीं

आँखें अपरिसीम हैं, संसृति का आधार है बिना दृष्टि का सृष्टि निवासी निराधार। ऑंखें बोती हैं देह-भूमि पर प्रेम-बीज इन आंखों पर ही जाता है हर रसिक रीझ। मन का हर उद्दाम भाव आँखें कह जातीं जहाँ रुका है मन…

Love Poems, Poetry, Ramyantar

मैं हुआ स्वप्न का दास

Water dream (Photo credit: @Doug88888) मैं हुआ स्वप्न का दास मुझे सपने दिखला दो प्यारे। बस सपनों की है आस मुझे सपने दिखला दो प्यारे॥ तुमसे मिलन स्वप्न ही था, था स्वप्न तुम्हारा आलिंगन जब हृदय कंपा था देख तुम्हें,…

Poetry, Ramyantar, Songs and Ghazals

मेरे साथी सलोने!

कहाँ भूल गया जीवन का राग, मेरे साथी सलोने । क्यों रूठ गया अपना यह भाग, मेरे साथी सलोने। कैसे जतन से ये जीवन सजाया पड़ गयी उस पर भी बैरन की छाया मेरा सूख गया लहराता फाग, मेरे साथी…

Poetry, Ramyantar

दर्द सहता रहा उसे ..

दर्द सहता रहा उसे, सहता है अब तलक। दर्द ने अपनी हस्ती भर उसे चाहा उसकी शिराओं, मांसपेशियों से होते- होते उसके मस्तिष्क, उसके हृदय तक अपनी पैठ बना ली, तब उसने इस दर्द को अपना नाम ही दे दिया।…

Poetic Adaptation, Poetry, Ramyantar

मैं सपनों का फेरीवाला

मैं सपनों का फेरीवाला, मुझसे सपन खरीदोगे क्या ? यह सपने जो चला बेचने, सब तेरे ही दिए हुए हैं, इन सपनों के चित्र तुम्हारी यादों से ही रंगे हुए हैं; मैं प्रिय-सुख ही चुनने वाला,मुझसे चयन खरीदोगे क्या? कहाँ…

Love Poems, Poetry, Ramyantar

वह ख़त नहीं, दस्तख़त था

एक कागज़ तुम्हारे दस्तख़त का मैंने चुरा लिया था, मैंने देखा कि उस दस्तख़त में तुम्हारा पूरा अक्स है। दस्तख़त का वह कागज़ मेरे सारे जीवन की लेखनी का परिणाम बन गया। मैंने देखा कि अक्षरों के मोड़ों में जिंदगी…

Love Poems, Poetry, Ramyantar

बोलो कैसे रह जाते हो तुम बिन बोले

बोलो कैसे रह जाते हो तुम बिन बोले जब कोई स्नेही द्वार तुम्हारे आकर तेरा हृदय टटोले। जब भी कोई पथिक हांफता, तेरे दरवाजे पर आए तेरे हृदय शिखर पर अपनी प्रेम-पताका फहराए, जब तेरी आतुरता में, कोई भी विह्वल…

Love Poems, Poetic Adaptation, Poetry, Ramyantar

तुम शायद झुंझला जाते हो!

प्रेम पत्रों का प्रेमपूर्ण काव्यानुवाद: तीन A close capture of hand written love letters. तुम शायद झुंझला जाते हो! कर ही क्या सकती हूँ छोड़ इसे हे प्राणाधिक बतलाओ ना जाने भी दो कृपा करो अब रोष मुझे दिखलाओ ना…

Poetry, Ramyantar, Songs and Ghazals

उत्तर अपना औरों से पूछा

प्रश्न स्वयं का उत्तर अपना औरों से पूछा, अपने मधु का स्वाद लुटेरे भौरों से पूछा। जाना जहाँ जहाँ से आया याद नहीं वह घर, माटी का ही रहा घरौंदा रचता जीवन भर- भोज-रसास्वादन कूकर के कौरों से पूछा। मूर्च्छा…

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

मत पूछना वही प्रश्न

अगर कभी ऐसा हो कि कहीं मिल जाओ तुम तो पूछने मत लगना वही अबूझे, अव्यक्त प्रश्न अपने नेत्रों से क्योंकि मेरी चुप्पी फ़िर तोड़ देगी, व्यथित कर देगी तुम्हें और तब मैं भी खंड-खंड हो जाऊंगा अपने उत्तरों को…