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Ramyantar

Poetry, Ramyantar

महसूस करता हूँ, सब तो कविता है

 (Photo credit: soul-nectar) मैं रोज सबेरे जगता हूँ दिन के उजाले की आहट और तुम्हारी मुस्कराहट साफ़ महसूस करता हूँ। चाय की प्याली से उठती स्नेह की भाप चेहरे पर छा जाती है। फ़िर नहाकर देंह ही नहींमन भी साफ़…

Ramyantar

दीपावली बीत गयी तो क्या

दीपावली की बधाई देते हुए अपने एक फौजी मित्र को शुभकामना-पत्र भेंजा था । आज वह मुझ तक वापस आ गया । पता नहीं मिला, या पहुंच न सका, पता नहीं । मैंने सोचा उसे यहाँ पोस्ट करुँ । भाव…

Poetry, Ramyantar

दिया राहु लिख चन्द्रमा लिखते-लिखते

 Flowers (Photo credit: soul-nectar) कविता: प्रेम नारायण ’पंकिल’ जो बोया वही तो फसल काटनी है दिया लिख अमा पूर्णिमा लिखते-लिखते। पथिक पूर्व का था चला किन्तु पश्चिम दिया राहु लिख चन्द्रमा लिखते-लिखते। रहा रात का ही घटाटोप बाँधेन बाहर निकलकर…

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

कविता और कविता का बहुत कुछ

१) कविता उमड़ आयी अन्तर्मन में जैसे उतर आता है मां के स्तनों में दूध। २)  कविता का छन्दसध गया वैसे हीजैसे स्काउट की ताली मेंमन का उत्साह। ३)  कविता का शब्दसज गया बहुविधिजैसे बनने को मालासजते हैं फूल। ४)कविता…

Poetry, Ramyantar

हंसी का व्यवहार

Hibiscus (Photo : soul-nectar) आंसू खूब बहें, बहते जांय हंसी नहीं आती, पर हंसी खूब आये तो आंखें भर-भर जाती हैं आंसू आ जाते हैं आंखों में। कौन-सा संकेत है यह प्रकृति का? वस्तुतः कितना विलक्षण है हंसी का यह…

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

मैंने कविता लिखी

मैंने कविता लिखी जिसमें तुम न थे तुम्हारी आहट थी और इस आहट में एक मूक छटपटाहट मैंने कविता लिखीजिसमें उभरे हुए कुछ अक्षर थेयद्यपि वो फूल नहीं थेपर फिर भी उनमें गंध थी मैंने कविता लिखीजिसमें इन्द्रधनुष नहीं थाहाँ,…

Poetry, Ramyantar

तो उसका अंशभूत सौन्दर्य निरखूंगा

Rose Bud (Photo credit: soul-nectar) यदि देख सका किसी वस्तु को उसकी पूर्णता में तो रचूंगा जो कुछ वह पूर्णतः अनावरित करेगा स्वयं को सौन्दर्य है क्या सिवाय एक केन्द्रीभूत सत्य के?जैसे सूरज या फिरजैसे आत्माजो अपनी अभिव्यक्ति,अपने प्रसार में…

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

तनिक पहचानें

तनिक पहचानें उस शील को जो डरता तो है संसार की अनगिनत अंधेरी राहों में चलते हुएपर अपने मन मेंऔर दूसरों की दृष्टि मेंबनना चाहता है वीरऔर इसलियेगाने लगता है।

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जो प्रश्न हैं अस्तित्वगत…

जो प्रश्न हैं अस्तित्वगत तूं खींच चिन्तन बीच मत बस जी उसे उस बीच चल उससे स्वयं को दे बदल। यदि प्रेम को है जानना तो खाक उसकी छानना उस प्रेम के भीतर उतर निज पूर्ण कायाकल्प कर। जो प्रश्न…

Poetry, Ramyantar

पात-पात में हाथापायी बात-बात में झगड़ा

पात-पात में हाथापायी बात-बात में झगड़ा किस पत्थर पर पता नहीं मौसम ने एड़ी रगड़ा। गांव गिरे औंधे मुंह गलियां रोक न सकीं रुलाई ’माई-बाबू’ स्वर सुनने को तरस रही अंगनाई, अब अंधे के कंधे पर बैठता नहीं है लंगड़ा।…