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Ramyantar

Ramyantar, नाटक

बतावत आपन नाम सुदामा (नाट्य) – तीन

पिछली प्रविष्टियों  ’बतावत आपन नाम सुदामा – एक और दो से आगे – (प्रहरी राजमहल में प्रवेश करता है। प्रभु मखमली सेज पर शांत मुद्रा में लेटे हैं। रुक्मिणी पैर सहला रही हैं। समीप में विविध भोग सामग्री सजी पड़ी…

Ramyantar, नाटक

बतावत आपन नाम सुदामा (नाट्य) – दो

पिछली प्रविष्टि से आगे –  दृश्य द्वितीय (द्वारिकापुरी का दृश्य। वैभव का विपुल विस्तार। धन-धान्य का अपार भण्डार। धनिक, वणिक, कुबेर हाट सजाये। संगीतागार, मल्लशाला, शुचि गुरुकुल, प्रशस्त मार्ग, गगनचुम्बी अट्टालिकाओं की मणि-माला, विभूषित अखण्ड शृंखला, सुसज्जित घने विटप एवं…

Audio, Ramyantar, लोक साहित्य

कब सुधिया लेइहैं मन के मीत

सहज, सरल, सरस भजन। बाबूजी की भावपूर्ण लेखनी के अनेकों मनकों में एक। छुटपन-से ही सुलाते वक़्त बाबूजी अनेकों स्वरचित भजन गाते और सुलाते। लगभग सभी रचनायें अम्मा को भी याद होतीं और उनका स्वर भी हमारी नींद का साक्षी…

Ramyantar, नाटक

बतावत आपन नाम सुदामा (नाट्य) – एक

दृश्य प्रथम (सुदामा की जीर्ण-शीर्ण कुटिया। सर्वत्र दरिद्रता का अखण्ड साम्राज्य। भग्न शयन शैय्या। बिखरे भाण्ड, मलिन वस्त्रोपवस्त्रम। एक कोने विष्णु का देवविग्रह। कुश का आसन। धरती पर समर्पित अक्षत-फूल। तुरन्त देवार्चन से उठे सुदामा भजन गुनगुना रहे हैं। सम्मुख…

Poetic Adaptation, Ramyantar, Translated Works, सौन्दर्य-लहरी

सौन्दर्य लहरी (छन्द संख्या 56-60)

सौन्दर्य लहरी का हिन्दी काव्य रूपांतर दृशा द्राघीयस्या दरदलितनीलोत्पलरुचादवीयांसं दीनं स्नपय कृपया मामपि शिवेअनेनायं धन्यो भवति न च ते  हानिरियतावने वा हर्म्ये वा समकर निपातो हिमकरः ॥५६॥दूरदृष्टि मनोहरा तवनील कंजदलाभिरामासींच दे मुझ दीन को भी सदय निज करुणा सलिल सेअहहः…

Poetic Adaptation, Ramyantar, Translated Works, सौन्दर्य-लहरी

सौन्दर्य लहरी (छन्द संख्या 51-55)

सौन्दर्य लहरी का हिन्दी काव्यानुवाद   गते कर्णाभ्यर्णं गरुत एव पक्ष्माणि दधतीपुरां भेत्तुश्चित्तप्रशमरसविद्रावणफले इमे नेत्रे गोत्राधरपतिकुलोत्तंस कलिकेतवाकर्णाकृष्ट स्मरशरविलासं कलयतः ॥५१॥जो कर्णान्तदीर्घ विशाल तेरे युगल दृग अभिरामपलक सायकयुक्तउनको खींच कर अपने श्रवण तकमन्मथ किया करता बाण का संधान तीव्र अचूक सपदि जिससे…

Ramyantar

होली में कुछ मेरी भी सुन!

होली में कुछ मेरी भी सुन। मन, मत अपने में ही जल भुन ।। जब शोभित नर्तित त्वरित सरित पर वासंती चन्द्रिका धवल। विचरता पृष्ठ पर पोत पीत श्यामल अलि मृदुल मुकुल परिमल। कामिनी-केलि-कान्तार-क्वणित तुम कंकण किंकिणि नूपुर सुन ।…

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सौन्दर्य लहरी (छन्द संख्या 46-50)

सौन्दर्य लहरी का हिन्दी काव्यानुवाद भ्रुवौ भुग्ने किं चिद्‌भुवनभयभंगव्यसनिनित्वदीये नेत्राभ्यां मधुकररुचिभ्यां धृतगुणम्‌ ॥धनुर्मन्ये सव्येतरकरगृहीतं रतिपतेःप्रकोष्ठे मुष्टौ च स्थगयति निगूढान्तरमुमे ॥४६॥कुटिल भृकुटि युगल नयन कीओ भुवनभयहारिणी हे!तुल्यताधृत ज्यों शरासनसुसज्जित मधुकरमयी अभिराम प्रत्यंचा जहाँ हैवाम करतल में स्वयं  धारण किएजिसको मदन हैभ्रू…

Ramyantar, नाटक

नल दमयंती -4

पहली, दूसरी एवं तीसरी कड़ी से आगे… पंचम दृश्य  (दमयंती स्वयंवर का महोत्सव। नृत्य गीतादि चल रहे हैं। राजा महाराजा पधार रहे हैं। सब अपने अपने निवास स्थान पर यथास्थान विराजित होते हैं। सुन्दरी दमयंती अपनी अंगकांति से राजाओं के मन और…