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Ramyantar

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माँ की गोद ही चैत्र की नवरात्रि है ..

एक ज्योति सौं जरैं प्रकासैं कोटि दिया लख बाती। जिनके हिया नेह बिनु सूखे तिनकी सुलगैं छाती। बुद्धि को सुअना मरमु न जानै कथै प्रीति की मैना। दिपै दूधिया ज्योति प्रकासैं घर देहरी अँगन। नवेली बारि धरैं दियना॥ —(आत्म प्रकाश…

Poetic Adaptation, Ramyantar, Translated Works, सौन्दर्य-लहरी

सौन्दर्य लहरी (छन्द संख्या 66-70)

सौन्दर्य लहरी का हिन्दी काव्यानुवाद कराग्रेण स्पृष्टं तुहिनगिरिणा वत्सलतयागिरीशेनोदस्तं मुहुरधरपानाकुलतया करग्राह्यं शंभोर्मुखमुकुरवृन्तं गिरिसुते कथंकारं ब्रूमस्तव चुबुकमौपम्यरहितम्॥66॥ पाणि सेवात्सल्यवशजिसको दुलारा हिमशिखर नेअधरपानाकुलितजिसकोकिया स्पर्शित चन्द्रधर नेमुख मुकुर के वृन्त समपकड़ा जिसे सविलास शिव नेकौन वर्णन कर सकेगाउस अमोलकचिबुक का फिरसत्य ही हैं ललित अनुपमचिबुक…

Gitanjali by Tagore, Ramyantar, Tagore's Poetry, Translated Works

जाग जाये यह मेरा देश (गीतांजलि का भावानुवाद)

यह देश अपूर्व, अद्भुत क्षमताओं का आगार है। यहाँ जो है, कहीं नहीं है, किन्तु यहाँ जो होता दिख रहा है वह भी कहीं नहीं है। इस देश की अनिर्वच प्रज्ञा और अद्वितीय पौरुष को विस्मरण ने आकंठ आवृत कर…

English Literary Figures, English Poets, Literary Classics, Poetry, Ramyantar, Translated Works

सुबह की प्रार्थना : निस्सीम ईजीकेल

जितना मेरा अध्ययन है उसमें भारतीय अंग्रेजी लेखकों में निस्सीम ईजीकेल का लेखन मुझे अत्यधिक प्रिय है। ईजीकेल स्वातंत्र्योत्तर भारतीय अंग्रेजी कविता के पिता के रूप में प्रतिष्ठित हैं। आधुनिक भारतीय अंग्रेजी काव्य में विशिष्ट स्थान प्राप्त ईजीकेल सहज कविता,…

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सौन्दर्य लहरी (छन्द संख्या 61-65)

सौन्दर्य लहरी का हिन्दी काव्यानुवाद प्रकृत्या‌‌ऽऽरक्तायास्तव सुदति दंतच्छदरुचेःप्रवक्ष्ये सादृश्यं जनयतु फलं विद्रुमलतान बिबं तद्बिबं प्रतिफलन रागादरुणितंतुलामध्यारोढुं कथमिव विलज्जते कलया ॥६१॥सुभग स्वाभाविक अरुणिमाधरतुम्हारे अधर पल्लवकौन ऐसा है तुलित होजो अधर की अरुणिमा सेफल जनन से हीनसमता है कहाँ विद्रुमलता कीरंचमात्र कला…

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शैलबाला शतक – भोजपुरी स्तुति काव्य : सात

शैलबाला शतक नयनों के नीर से लिखी हुई पाती है। इसकी भाव भूमिका अनमिल है, अनगढ़ है, अप्रत्याशित है।करुणामयी जगत जननी के चरणों में प्रणत निवेदन हैं शैलबाला शतक के यह छन्द! शैलबाला-शतक के प्रारंभिक चौबीस छंद कवित्त शैली में…

Poetic Adaptation, Ramyantar, Translated Works

टू बॉडीज (Two Bodies) : ऑक्टॉवियो पाज़

प्रायः ऐसा होता है कि फेसबुक पर देखी पढ़ी गयी प्रविष्टियों पर कुछ कहने का मन हो तो उसके टिप्पणी स्थल की अपेक्षा ब्लॉग पर लिख देने की आदत बना ली है मैंने। यद्यपि ऐसा भी कम ही हो पाता…

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शैलबाला शतक – भोजपुरी स्तुति काव्य : छ्‍ः

शैलबाला शतक भगवती पराम्बा के चरणों में वाक् पुष्पोपहार है। यह स्वतः के प्रयास का प्रतिफलन हो ऐसा कहना अपराध ही होगा। उन्होंने अपना स्तवन सुनना चाहा और यह कार्य स्वतः सम्पादित करा लिया। यह उक्ति सार्थक लगी- “जेहि पर…

Ramyantar, नाटक, नाट्य

बतावत आपन नाम सुदामा (नाट्य) – तीन

पिछली प्रविष्टियों  ’बतावत आपन नाम सुदामा – एक और दो से आगे – (प्रहरी राजमहल में प्रवेश करता है। प्रभु मखमली सेज पर शांत मुद्रा में लेटे हैं। रुक्मिणी पैर सहला रही हैं। समीप में विविध भोग सामग्री सजी पड़ी…