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नवागत प्रविष्टियाँ

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क्यों? (कविता)

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

क्यों?खो गए हो विकल्प में,चर्चित स्वल्प मेंविस्मृत सुमधुर अतीतक्यों लेकर चलते होबेगाना गीतस्वर्ग की ईच्छा क्योंछोड़ दी तुमनेआख़िर अनसुलझी, अस्तित्वविहीनअनगिनत…

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प्रभु आप जगो, परमात्म जगो: सच्चा की सच्ची पुकार

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

अभी सुबह नहीं हुई है, पर जाग गया हूँ। एक अनोखी पुकार मन को वर्षों से आकर्षित करती रहती है,…