Monthly Archives

March 2009

Poetry, Ramyantar

प्रार्थना मैं कर रहा हूं

प्रार्थना मैं कर रहा हूं गीत वह अव्यक्त-सा अनुभूतियों में घुल-मिले। हंसी के भीतर छुपा बेकल रुंआसापन और सम्पुट में अधर के बेबसी का क्षण, प्रार्थना मैं कर रहा हूं अश्रु जो ठहरा हुआ शुभ भाव ही के हित निकल…

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अंग्रेजी में हिन्दी का रचना संसार : शुरुआत भर कर रहा हूँ

हिन्दी साहित्य की अबाध धारा निरन्तर प्रवाहित हो रही है और उसकी श्री वृद्धि निरन्तर दृष्टिगत हो रही है। हिन्दी साहित्य के विविध आयामों में इतना सबकुछ जुड़ता और संचित होता चला जा रहा है कि हमारी राष्ट्रभाषा का कोश…

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प्रेम के अमूल्य कण

तुमने अपने हृदय में जो अनन्त वेदना समो ली है और उस वेदना को ही अपनी अमूल्य सम्पत्ति समझ उसे पोषित करते हो वस्तुतः उसी से प्राप्त प्रेम के अमूल्य कण                                          मेरे निर्वाह के साधन हैं। मैं एक मुक्त पक्षी…

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प्यार और मुक्त हृदय

वह तुम्हारा मुक्त हृदय था जिसने मुझे प्यार का विश्वास दिया, मैं तुम्हें प्यार करने लगा। मैं तुम्हें प्यार करता था अपनी समस्त जड़ता से ऊपर उठकर और इसलिये ही तुम मुक्त हृदय थे।

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बनारस की होली बनारस की बोली में

अब का पूछ्त हउआ हमसे कि होली का होला। कइसे तोंहके हाल बताई कवन तरीके से समझाई कइसन बखत रहल हऽ ऊ भी कवने भाषा में बतलाई, उछरत रहल बांस भर मनवां जमत रहल जब गोला। छैल चिकनियां छटकत रहलन…

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बनारस के प्रकाशन पुरुष: कृष्णचन्द्र बेरी

बनारस के प्रकाशन-संस्थानों में ‘हिन्दी प्रचारक संस्थान‘ का एक विशेष महत्व है। महत्व मेरी दृष्टि में इसलिये है कि इस संस्थान ने मेरी पठन-रुचि को तुष्ट करने में बड़ी भूमिका निभायी है। मेरे जैसे सामान्य आर्थिक पृष्ठ्भूमि के अध्येता और…

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ईश्वर की कानाफूसियाँ

हम सबके अपने-अपने अलग-अलग ईश्वर कानाफूसी किया करते हैं। क्या संसार के  हम सभी लोगों को चुप नहीं हो जाना चाहिये- जैसा ’इमरसन’ कहता है- कि हम ईश्वर की कानाफूसियाँ सुन सकें!

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विशिष्ट अनुभव

photo :http://www.surrealview.net/art.htm विशिष्ट अनुभव है क्या? यही कि कोयल के गीतों में हमें गणित के सवालों के हल मिलें और बाघ की मुस्कराहट के कूटार्थ हम समझ लें।