Contemplation, Essays, Ramyantar, चिंतन

सब कुछ ने मन का चैन हर लिया है

कुछ पाने, न पाने की बेचैनी, जीवन की शान्ति और अन्तर्भूत आनन्द को पाने की छटपटाहट में कई बार मन उद्विग्न हो जाया करता है। अपना आन्तर जीवन तनाव और बेचैनी का जीवन महसूस होता है, जो पीड़ित है, असुरक्षित…

Poetry, Ramyantar

तो उसका अंशभूत सौन्दर्य निरखूंगा

Rose Bud (Photo credit: soul-nectar) यदि देख सका किसी वस्तु को उसकी पूर्णता में तो रचूंगा जो कुछ वह पूर्णतः अनावरित करेगा स्वयं को सौन्दर्य है क्या सिवाय एक केन्द्रीभूत सत्य के?जैसे सूरज या फिरजैसे आत्माजो अपनी अभिव्यक्ति,अपने प्रसार में…

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

तनिक पहचानें

तनिक पहचानें उस शील को जो डरता तो है संसार की अनगिनत अंधेरी राहों में चलते हुएपर अपने मन मेंऔर दूसरों की दृष्टि मेंबनना चाहता है वीरऔर इसलियेगाने लगता है।

Article, General Articles, Ramyantar, आलेख

वाक् वैदग्ध्य, हास्य और चुनाव का महापर्व

आजकल चुनावों का महापर्व ठाठें मार रहा है। इस महापर्व के संवाद-राग में मैने वाक् वैदग्ध्य के प्रकार ढूंढे। माफी मुझे पहले ही मिल जानी चाहिये यदि यह सब कुछ केवल बुद्धि का अभ्यास लगे। बात यह भी थी कि…

Poetic Adaptation, Poetry, Ramyantar

जो प्रश्न हैं अस्तित्वगत…

जो प्रश्न हैं अस्तित्वगत तूं खींच चिन्तन बीच मत बस जी उसे उस बीच चल उससे स्वयं को दे बदल। यदि प्रेम को है जानना तो खाक उसकी छानना उस प्रेम के भीतर उतर निज पूर्ण कायाकल्प कर। जो प्रश्न…

Poetry, Ramyantar

पात-पात में हाथापायी बात-बात में झगड़ा

पात-पात में हाथापायी बात-बात में झगड़ा किस पत्थर पर पता नहीं मौसम ने एड़ी रगड़ा। गांव गिरे औंधे मुंह गलियां रोक न सकीं रुलाई ’माई-बाबू’ स्वर सुनने को तरस रही अंगनाई, अब अंधे के कंधे पर बैठता नहीं है लंगड़ा।…

Ramyantar, Stories

आत्मा की अमरता (एक अफ्रीकी मिथक कथा )

मृत्यु और आत्मा में दुश्मनी थी, मृत्यु ने कहा, “मैं… तुम्हें मार डालूंगी”। आत्मा ने उत्तर दिया, “मुझे… मारा नहीं जा सकता।” आत्मा और उसके साथी मौत के गांव गये । आत्मा ने पहले चमगादड़ को टोह लेने के लिये…

Poetry, Ramyantar, Songs and Ghazals

ले प्रसाद जय बोल सत्यनारायण स्वामी की

बजी पांचवी शंख कथा वाचक द्रुतगामी की। ले प्रसाद जय बोल सत्यनारायण स्वामी की। फलश्रुति बोले जब मन हो चूरन हलवा बनवाओ बांट-बांट खाओ पंचामृत में प्रभु को नहलाओ, इससे गलती धुल जायेगी क्रोधी-कामी की। कलश नवग्रह गौरी गणपतिपर दक्षिणा…

Poetry, Ramyantar

प्रार्थना मैं कर रहा हूं

प्रार्थना मैं कर रहा हूं गीत वह अव्यक्त-सा अनुभूतियों में घुल-मिले। हंसी के भीतर छुपा बेकल रुंआसापन और सम्पुट में अधर के बेबसी का क्षण, प्रार्थना मैं कर रहा हूं अश्रु जो ठहरा हुआ शुभ भाव ही के हित निकल…

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अंग्रेजी में हिन्दी का रचना संसार : शुरुआत भर कर रहा हूँ

हिन्दी साहित्य की अबाध धारा निरन्तर प्रवाहित हो रही है और उसकी श्री वृद्धि निरन्तर दृष्टिगत हो रही है। हिन्दी साहित्य के विविध आयामों में इतना सबकुछ जुड़ता और संचित होता चला जा रहा है कि हमारी राष्ट्रभाषा का कोश…