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रचना का स्वान्तःसुख, सर्वान्तःसुख भी है

बिना किसी बौद्धिक शास्त्रार्थ के प्रयोजन से लिखता हूँ अतः ‘हारे को हरिनाम’ की तरह हवा में मुक्का चला लेता हूँ, और अपनी बौद्धिक ईमानदारी निभा लेता हूँ। स्वान्तःसुखाय रचना भी विमर्श के झमेले में पड़ जाय तो क्या करें…

Love Poems, Poetic Adaptation, Poetry, Ramyantar

अथ-इति दोनों एक हो गए

A Close Capture of Hand-written Love-Letters स्नातक कक्षा में पढ़ते हुए कई किस्म के प्रेम पत्र पढ़े। केवल अपने ही नहीं, दूसरों के भी। अपनी इच्छा से नहीं, दूसरों की इच्छा से। उनमें से कुछ ऐसे थे जिन्होंने बहुत भीतर…

Poetry, Ramyantar

मैं मच्छरदानी नहीं लगाता तो इसका मतलब है …

Mosquito net (Photo credit: quinet) मच्छरदानी लगाना मेरे कस्बे में सुरक्षित व सभ्य होने की निशानी है । मैं मच्छरदानी नहीं लगाता तो इसका मतलब है कि मैं हाईस्कूल की जीव विज्ञान की पुस्तक का सबक भूल गया हूँ ,…

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मैं कुन्नू सिंह के ‘कुन्नू ब्लॉग से अपना ताल्लुक नहीं बना पाता

“इस नजाकत का बुरा हो , वो भले हैं तो क्या। हाथ आयें तो उन्हें हाथ लगाये न बने॥” (ग़ालिब ) तकनीकी रूप से सिद्धहस्त हैं तो भी क्या ? अपनी नयी निराली प्रविष्टियों के लिए बहुप्रशंसित हैं तो भी…

Poetry, Ramyantar

खामोशी हर प्रश्न का जवाब है

Silence – A Fable (Photo credit: thepeachmartini) मुझे नहीं लगता कि खामोशी जवाब नहीं देती। मैं समझता हूँ खामोशी एक तीर्थ है जहाँ हर बुरा विचार अपनी बुराई धो डालता है । ये हो सकता है की तीर्थ के रास्ते…

Poetry, Ramyantar, Songs and Ghazals

मुंह की कालिख को पोंछ उंगली से गाल का तिल बना दिया तुमने

क्या करिश्मा है इस बुझे दिल को, कितना खुशदिल बना दिया तुमने अब तो मुश्किल को भी मुश्किल कहना, बहुत मुश्किल बना दिया तुमने। पाँव इस दर पै आ ठिठक जाते, हाँथ उठते भी तो सलीके से आँख नम, क्या…

Poetry, Ramyantar

वास्तविक अन्तिम उपलब्धि

मैं चला था जिंदगी के रास्ते पर मुझे सुख मिला । मैंने कहा,” बड़ी गजब की चीज हो आते हो तो छा जाते हो जीवन में अमृत कण बरसाने लगते हो, सूर्य का उगना दिखाते हो झरनों का गिरना, नदियों…

Love Poems, Poetry, Ramyantar

क्यों रह रह कर याद मुझे आया करते हो?

नीरवता के सांध्य शिविर में आकुलता के गहन रूप में उर में बस जाया करते हो । बोलो प्रियतम क्यों रह रह कर याद मुझे आया करते हो ? आज सृष्टि का प्रेय नहीं हिय में बसता है मिले हाथ…

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

अभी तक मैं चल रहा हूँ, चलता ही जा रहा हूँ

(१) “बहुत दूर नहीं बहुत पास “ कहकर तुमने बहका दिया मैं बहक गया । (२) “एक,दो,तीन…..नहीं शून्य मूल्य-सत्य है “ कहा फिर अंक छीन लिए मैं शून्य होकर विरम गया । (३) तुम हो जड़ों के भीतर, वृन्त पर…