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आतंकवाद और साम्प्रदायिकता

भारत की साझी विरासत को लेकर बड़ा चिंतनशील हो चला हूँ। भारत की यह साझी विरासत सम्प्रदायवाद और आतंकवाद के साझे में चली गयी है। कभीं सम्प्रदायवाद बहकता है और किसी न किसी धर्म,सम्प्रदाय के कन्धों पर कट्टरता व धर्मांतरण…

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मत पूछना वही प्रश्न

अगर कभी ऐसा हो कि कहीं मिल जाओ तुम तो पूछने मत लगना वही अबूझे, अव्यक्त प्रश्न अपने नेत्रों से क्योंकि मेरी चुप्पी फ़िर तोड़ देगी, व्यथित कर देगी तुम्हें और तब मैं भी खंड-खंड हो जाऊंगा अपने उत्तरों को…

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किस-किसका दूर करूँगा मैं, संदेह यहाँ जन-जन के (‘बच्चन’ के जन्म दिवस पर)

मधुशाला व बच्चन पर फतवे की आंच अभी धीमी नहीं पड़ी होगी। ‘बच्चन’ होते तो ऐसे फतवों के लिए कह डालते – “मैं देख चुका जा मस्जिद में झुक-झुक मोमिन पढ़ते नमाज, पर अपनी इस मधुशाला में पीता दीवानों का…

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उड़ चली है आत्मा परमात्मा के पास

सच में ‘मैना’ ही नाम था उसका। मेरे पास अब केवल यादें शेष रह गयी हैं उसकी। छः बरस पहले अचानक ही लिख गयी थी यह कविता। आज मैना उड़ चली पिता के घर से पिया के घर गीलीं हो…

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हिन्दी ब्लॉग लेखन : विरुद्धों का सामंजस्य

हिन्दी ब्लॉग लेखन के कई अंतर्विरोधों में एक है सोद्देश्य, अर्थयुक्त एवं सार्वजनीन बन जाने की योग्यता रखने वाली प्रविष्टियों, और आत्ममुग्ध, किंचित निरुद्देश्य, छद्म प्रशंसा अपेक्षिता प्रविष्टियों का सह-अस्तित्व। सोद्देश्य, गहरी अर्थवत्ता के साथ लिखने वाला ब्लॉगर अपनी समस्त…

Love Poems, Poetry, Ramyantar

मुझमें जो आनंद विरल है

मुझमें जो आनंद विरल है वह तुमसे ही निःसृत था और तुम्हीं में जाकर खोया । घूमा करता हूँ हर पल, जीवन में प्रेम लिए निश्छल कुछ रीता है, कुछ बीता है, झूठा है यह संसार सकल यह चिंतन जो…

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नेह-स्वांग

उसने नेह-स्वांग रच कर अपने सामीप्य का निमंत्रण दिया नेह सामीप्य के क्षणों में झूठा न रह सका अपने खोल से बाहर आकर नेह ने अपनी कलई खोली दिखा वही गुनगुना-सा निष्कवच, निःस्वांग विदेह नेह । क्षुधा की तृप्ति नेह…

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प्रिय! तुमने लिखा आँख भर आयी

प्रेम पत्रों का प्रेम पूर्ण काव्यानुवाद: दो प्रिय! तुमने लिखा आँख भर आयी, मैंने अपने दिन खोये और रात गंवाई । मेरी भाव भूमि के बदले सच, तुमने ही पहले पहले संचित भाव कोष दे दिया, ‘विंहसेगा मानस उर अन्तर’…

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काश! मेरा मन

काश! मेरा मन सरकंडे की कलम- सा होता जिसे छील-छाल कर, बना कर भावना की स्याही में डुबाकर मैं लिखता कुछ चिकने अक्षर – मोतियों-से, प्रेम के।