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नवागत प्रविष्टियाँ

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शैलबाला शतक: भोजपुरी स्तुति काव्य (दो)

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

माँ के काली स्वरूप की अभ्यर्थना के चार कवित्त पुनः प्रस्तुत हैं। इस भोजपुरी स्तुति काव्य में शुरुआत के आठ…

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शैलबाला शतक: भोजपुरी स्तुति काव्य (एक)

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey
9 Min Read

जीवन में ऐसे क्षण अपनी आवृत्ति करने में नहीं चूकते जब जीवन का केन्द्रापसारी बल केन्द्राभिगामी होने लगता है। मेरे…

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सखिया आवा उड़ि चलीं – अर्चना जी ने गाया

इसी ब्लॉग पर मेरी इस प्रविष्टि में मैंने और चारुहासिनी ने एक गीत सखिया आवा उड़ि चलीं ओही बनवा हो…

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रामजियावन दास बावला: भोजपुरी के तुलसीदास

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

रामजियावन दास बावला को पहली बार सुना था एक मंच पर गाते हुए! ठेठ भोजपुरी में रचा-पगा ठेठ व्यक्तित्व! सहजता…

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हाय दइया करीं का उपाय और सखिया आवा उड़ि चलीं..

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

इधर संवाद-स्वाद, फिर अवसाद के कुछ क्षणों से गुजरते हुए चारुहासिनी की मनुहार से बाबूजी के लिखे कई गीत यूँ…