आओ चलो, दीप रखते हैं (कविता)
आओ चलो, दीप रखते हैं कविता जीवन के हर उस कोने…
Arattai – संदेश और संवाद माध्यमों का स्वदेशी संस्करण
आत्मनिर्भर भारत के गुंजित स्वर में प्रधानमंत्री के स्वदेशी अपनाने के…
आशीष त्रिपाठी का काव्य संग्रह शान्ति पर्व
शान्ति पर्व पढ़ गया। किसी पुस्तक को पढ़ कर चुपचाप मन…
नवागत प्रविष्टियाँ
शैलबाला शतक: भोजपुरी स्तुति काव्य (दो)
माँ के काली स्वरूप की अभ्यर्थना के चार कवित्त पुनः प्रस्तुत हैं। इस भोजपुरी स्तुति काव्य में शुरुआत के आठ…
शैलबाला शतक: भोजपुरी स्तुति काव्य (एक)
By Himanshu Pandey जीवन में ऐसे क्षण अपनी आवृत्ति करने में नहीं चूकते जब जीवन का केन्द्रापसारी बल केन्द्राभिगामी होने लगता है। मेरे…
सखिया आवा उड़ि चलीं – अर्चना जी ने गाया
इसी ब्लॉग पर मेरी इस प्रविष्टि में मैंने और चारुहासिनी ने एक गीत सखिया आवा उड़ि चलीं ओही बनवा हो…
रामजियावन दास बावला: भोजपुरी के तुलसीदास
रामजियावन दास बावला को पहली बार सुना था एक मंच पर गाते हुए! ठेठ भोजपुरी में रचा-पगा ठेठ व्यक्तित्व! सहजता…
हाय दइया करीं का उपाय और सखिया आवा उड़ि चलीं..
इधर संवाद-स्वाद, फिर अवसाद के कुछ क्षणों से गुजरते हुए चारुहासिनी की मनुहार से बाबूजी के लिखे कई गीत यूँ…
करुणावतार बुद्ध: दस
करुणावतार बुद्ध- 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 के बाद प्रस्तुत है दसवीं कड़ी। करुणावतार बुद्ध (अगम्य-गम्य…

