आओ चलो, दीप रखते हैं (कविता)
आओ चलो, दीप रखते हैं कविता जीवन के हर उस कोने…
Arattai – संदेश और संवाद माध्यमों का स्वदेशी संस्करण
आत्मनिर्भर भारत के गुंजित स्वर में प्रधानमंत्री के स्वदेशी अपनाने के…
आशीष त्रिपाठी का काव्य संग्रह शान्ति पर्व
शान्ति पर्व पढ़ गया। किसी पुस्तक को पढ़ कर चुपचाप मन…
नवागत प्रविष्टियाँ
इस थकानमय निशि में प्रिय.. (गीतांजलि का भावानुवाद )
In the night of weariness let me give myself up to sleep without struggle, resting my trust upon thee. Let…
पिया संग खेलब होरी
फागुन का महीना आते ही हवा में जैसे अनदेखा रंग घुल जाता है – आँगन, मन और स्मृतियाँ सब एक…
मुझे प्रेम करने दो केवल मुझे प्रेम करने दो ..
जॉन डन (John Donne) की कविता ’द कैनोनाइजेशन’ (The Canonization) का भावानुवाद परमेश्वर के लिये मौन अपनी रसना रहने दो…
प्राण रच रहे तम का खेला (गीतांजलि का भावानुवाद )
Clouds heap upon clouds and it darkens. Ah, love, why dost thou let me wait outside at the door all…
आया है प्रिय ऋतुराज …
वसंत प्रकृति का एक अनोखा उपहार है। आधी फरवरी से आधे अप्रैल तक का समय वसंत का समय है। इसमें…
सौन्दर्य लहरी (छन्द संख्या 4-6)
सौन्दर्य लहरी का हिन्दी भाव रूपांतर त्वदन्यः पाणिभ्यामभयवरदो दैवतगणःत्वमेका नैवासि प्रकटित वराभीत्यभिनया,भयात् त्रातुं दातुं फलमपि च वांछासमधिकंशरण्ये लोकानां तव हि…

