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नवागत प्रविष्टियाँ

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भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की रचना – क़ानून ताज़ीरात शौहर (पति दंड विधान)

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

अपने समय की विरलतम अभिव्यक्ति, सशक्त वाणी भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का जन्मदिवस है आज। भारतेन्दु आधुनिक हिन्दी के जन्मदाता और बहुआयामी,…

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रमणी के नर्म वाक्यों से फूल उठा मंदार : वृक्ष दोहद-8

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

मुझे क्षण-क्षण मुग्ध करती, सम्मोहित करती वृक्ष दोहद की चर्चा जारी है। मंदार की चर्चा शेष थी अभी। कैसा विश्वास…

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मलहवा बाबा और गंगा पार-उतराई का लोकगीत: केवट-रानी संवाद

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

ढोलक की चिर-परिचित टुनटुनाहट के साथ इस वर्ष भी मलहवा बाबा और गंगा पार-उतराई का लोकगीत मेरे दरवाजे तक आ…

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निर्निमेष अविरत दृष्टि

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

कई बार निर्निमेषअविरत देखता हूँ उसे यह निरखनाउसकी अन्तःसमता को पहचानना है मैं महसूस करता हूँनदी बेहिचक बिन विचारेअपना सर्वस्व…

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एक शान्त मन ही व्रती होता है

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

आजकल एक किताब पढ़ रहा हूँ – आचार्य क्षेमेन्द्र की औचित्य-दृष्टि। किताब बहुत पुरानी है- आवरण के पृष्ठ भी नहीं…

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हजारी प्रसाद द्विवेदी की रचनाओं में मानवीय संवेदना

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

ऋग्वेद में वर्णन आया है : ‘शिक्षा पथस्य गातुवित’, मार्ग जानने वाले , मार्ग ढूढ़ने वाले और मार्ग दिखाने वाले,…