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नवागत प्रविष्टियाँ

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जो कर रहा है यहाँ पुरुष (कविता)

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

राजकीय कन्या महाविद्यालय के ठीक सामनेसंघर्ष अपनी चरमावस्था में है,विद्रूप शब्दों से विभूषित जिह्वा सत्वर श्रम को तत्पर है,कमर की…

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अखिल शान्ति है तुम्हारा ध्यान

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

प्रेम में केवल दो अस्तित्व नहीं मिलते, बल्कि स्वयं से साक्षात्कार और रूपांतरण की एक आध्यात्मिक यात्रा भी प्रारंभ होती…