आओ चलो, दीप रखते हैं (कविता)
आओ चलो, दीप रखते हैं कविता जीवन के हर उस कोने…
Arattai – संदेश और संवाद माध्यमों का स्वदेशी संस्करण
आत्मनिर्भर भारत के गुंजित स्वर में प्रधानमंत्री के स्वदेशी अपनाने के…
आशीष त्रिपाठी का काव्य संग्रह शान्ति पर्व
शान्ति पर्व पढ़ गया। किसी पुस्तक को पढ़ कर चुपचाप मन…
नवागत प्रविष्टियाँ
जो कर रहा है यहाँ पुरुष (कविता)
राजकीय कन्या महाविद्यालय के ठीक सामनेसंघर्ष अपनी चरमावस्था में है,विद्रूप शब्दों से विभूषित जिह्वा सत्वर श्रम को तत्पर है,कमर की…
He came and sat by my side but Iwoke not.
The poem “He came and sat by my side but I woke not” is a beautiful and evocative piece by…
तो मर्द बखानूँ मैं
पिस-पिस कर भर्ता हुए समय के कोल्हू मेंतुम समायातीत बनो तो मर्द बखानूँ मैं। जाने कितने घर-घर के तुम व्यवहार…
मैं अभी भी खड़ा हूँ (कविता)
तुम्हें नहीं पताकितनी देर सेतुम्हारी राह देख रहा हूँ। तुमने कहा था आने के लिएअंतरतम में अनुरागी दीप जलाने के…
अखिल शान्ति है तुम्हारा ध्यान
प्रेम में केवल दो अस्तित्व नहीं मिलते, बल्कि स्वयं से साक्षात्कार और रूपांतरण की एक आध्यात्मिक यात्रा भी प्रारंभ होती…
भिक्षुक : नख-शिख वर्णन (हिन्दी कविता)
कुछ दिनों पहले एक भिक्षुक ने दरवाजे पर आवाज दी। निराला का कवि मन स्मृत हो उठा। वैसी करुणा का…

