Monthly Archives

January 2009

Poetry, Ramyantar

पढ़ा तुम्हारा गीत-पत्र

एक खामोशी-सी दिखी एक इंतिजार भी दिखा अनसुलझी आंखों में बेकली का सिमटा ज्वार भी दिखा, आशाओं के दीप भी जले विश्वास के सतरंगी स्वप्न भी खिले लगा जैसे हर सांस वीणा के सुर में सुर मिलाकर गुनगुना रही हो,…

Article, Contemplation, Essays, Ramyantar, आलेख, चिंतन

कह दूँ उसी से..

सोचता हूं, इतनी व्यस्तता, भाग-दौड़, आपाधापी में कितनी रातें, कितने दिन व्यतीत किये जा रहा हूं। क्या है जो चैन नहीं लेने दे रहा है? कौन सी जरूरत है जो सोने नहीं देती है? कौन-सा मुहूरत है जो अभी मृगजल…

Poetry, Ramyantar

कितना सिखाओगे मुझे?

चेहरे पर मौन सजा लेते हो क्योंकि बताना चाहते हो मुझे मौन का मर्म, हर पल प्रेम और स्नेह से सहलाते हो मुझे शायद बताना चाहते हो एक स्नेही,एक प्रेमी का कर्म आकंठ डूब जाते हो हास्य में मेरे जैसे…

General Articles, Ramyantar

नए साल की सबसे सुंदर शुभकामना

What she had created…. साल भर पहले जब वह एक हफ्ते के लिए मेरे घर आयी थी, उसे ‘ई-मेल’ करना सिखाया था- उसने समझा नहीं था कुछ भी, बस याद भर कर लिया था तरतीब से। मैंने सोचा क्षणिक उत्साह…

Love Poems, Poetic Adaptation, Ramyantar

इस छलना में पड़ी रहूँ

प्रेम पत्रों का प्रेमपूर्ण काव्यानुवाद: छ: इस छलना में पड़ी रहूँ यदि तेरा कहना एक छलावा। तेरे शब्द मूर्त हों नाचें मैं उस थिरकन में खो जाऊँ तेरी कविता की थपकी से मेरे प्रियतम मैं सो जाऊँ अधर हिलें मैं…

Ramyantar, Stories

कैसा भय?

Mysterious Voyage (Photo credit: Pat McDonald) एक सैनिक अधिकारी अपनी नव-विवाहिता पत्नी के साथ समुद्री यात्रा कर रहा था. अकस्मात एक भयानक तूफ़ान आ गया। सागर की लहरें आसमान छूने लगीं। ऐसा प्रतीत होने लगा, मानो सामने साक्षात मौत खड़ी…

Love Poems, Poetic Adaptation, Poetry, Ramyantar

नहीं, प्रेम है कार्य नहीं

प्रेमिका ने कहा था-“प्यार करते हो मुझसे?” प्रेमी ने कहा-“प्यार करने की वस्तु नहीं। मैं प्यार ’करता’ नहीं, ’प्यार-पूरा’ बन गया हूं। यहां इसी संवाद का विस्तार है- Hibiscus (Photo credit: soul-nectar) कहने वाला कह जाता है सुनने वाला सुन…

Article, Essays, General Articles, आलेख

गोबर गणेशों की गोबर-गणेशता

“पहले आती थी हाले दिल पे हंसी अब किसी बात पर नहीं आती ।” कैसे आए? मात्रा का प्रतिबन्ध है। दिल के हाल का हाल जानिए तो पता चले कितनी मारामारी है? हंसी का गुण ही है की वह वह…

Love Poems, Poetic Adaptation, Poetry, Ramyantar

अपने प्रेम-सरित को मेरे हृदय जगत पर बह जाने दो

प्रेम पत्रों का प्रेमपूर्ण काव्यानुवाद: पाँच Capture of Love Letters अब तक जो मैं हठ करती थी, हर इन्सान अकेला होता मुझे पता क्या था जीवन यह अपनों का ही मेला होता। यही सोचती थी हर क्षण केवल मनुष्य अपने…

Article, Contemplation, Essays, आलेख, चिंतन

सदैव सहमति में हिलते सिर

बहुत वर्षों पहले से एक बूढ़े पुरूष और स्त्री की आकृति के उन खिलौनों को देख रहा हूँ जिनके सर और धड़ आपस में स्प्रिंग से जुड़े हैं। जब भी उन खिलौनों को देखता हूँ वो अपना सर हिलाते मालूम…